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मंगलवार, जून 09, 2026

उझानी/जिला बदायूँ - क्षेत्र के बढ़ रहा आवारा पशुओ व बंदरो का आतंक, छत पर काम कर रही महिला पर किया बंदरो ने हमला, गंभीर घायल

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उत्तर प्रदेश के जिला बदायूं मे बढ़ रहा आवारा पशुओ व बंदरो का आतंक अब स्थानीय निवासियो के लिया जानलेवा साबित हो रहा है। ऐसा ही एक मामला उझानी थाना क्षेत्र से प्रकाश मे आया है। यहाँ आज मंगलवार की सुबह किसी काम से घर की छत पर गयी एक महिला पर बंदरो के झुंड ने हमला कर दिया। बंदरो के हमले से बचने के प्रयास मे महिला छत से नीचे आ गिरी और गंभीर रूप से घायल हो गयी। आवारा पशुओ व बंदरो के बढ़ रहे आतंक के चलते ग्रामीणो ने दहशत के साथ ही प्रशासन के खिलाफ भी आक्रोश पनप रहा है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र थाना क्षेत्र के गाँव पलिया पुख्ता निवासी महेश की पत्नी उषा आयु 35 वर्ष आज मंगलवार की सुबह किसी जरूरी काम से घर की छत पर गयी थी। इसी दौरान बंदरो के एक बड़े झुंड ने उन्हें चारो ओर से घेर लिया और हमला कर दिया। बंदरों को अपनी ओर आता देख उषा घबरा गईं और बचाव के लिए छत पर इधर-उधर भागने लगीं। इसी आपाधापी में उनका संतुलन बिगड़ गया और वह छत से सीधे नीचेआ गिरीं। ऊंचाई से गिरने के कारण उन्हें शरीर और सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। चीख-पुकार सुनकर दौड़े परिजनों ने आनन-फानन मे उषा को उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है।


पाठको को बताना उचित होगा कि बंदरो के हमले का यह पहला मामला नही है। ग्रामीणों ने बताया कि अभी एक दिन पहले ही गाँव के रहने वाले 75 वर्षीय बुजुर्ग कल्याण सिंह पर भी बंदरों ने जानलेवा हमला कर दिया था। उनकी हालत इतनी बिगड़ गई थी कि उन्हें जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा, जहाँ वे जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। लगातार हो रहे इन हमलों से पलिया पुख्ता गाँव में अघोषित कर्फ्यू जैसा माहौल है। लोग अपने घरों की छतों पर जाने से कतरा रहे हैं। सबसे ज्यादा डर छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर है, जो आसानी से इन बंदरों का शिकार बन जाते हैं।

गांव पलिया पुख्ता के ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार स्थानीय प्रशासन और वन विभाग से बंदरों के इस आतंक से निजात दिलाने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस या प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने एक बार फिर जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द गाँव में पिंजरे लगवाकर इन खूंखार बंदरों को पकड़वाया जाए और उन्हें घने जंगलों में छोड़ा जाए, ताकि लोग अपने ही घरों में सुरक्षित महसूस कर सकें।

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