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गुरुवार, जुलाई 02, 2026

संभल/उत्तर प्रदेश - ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली का आरोप, 4 के खिलाफ मुकदमा दर्ज

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उत्तर प्रदेश के जिला सम्भल से एआरटीओ कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए निर्धारित सरकारी शुल्क से अधिक रकम वसूले जाने का मामला प्रकाश मे आया है। अवैध वसूली से जुड़ी शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। शिकायत के आधार पर कंप्यूटर ऑपरेटर, एक बाबू, एक अन्य कर्मचारी और एक निजी व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना रायसत्ती क्षेत्र के मोहल्ला मियां सराय किला अलीशा निवासी आदिल पुत्र नजीम ने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि वह एआरटीओ कार्यालय के पास ऑनलाइन फीस जमा कराने का कार्य करते हैं। उनके मुताबिक यहाँ ड्राइविंग लाइसेंस के लिए निर्धारित ₹1350 की सरकारी फीस के अलावा आवेदकों से ₹2150 तक वसूले जा रहे थे। इस तरह प्रत्येक लाइसेंस पर करीब ₹800 अतिरिक्त राशि ली जा रही थी।


शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अंकित चौधरी, बाबू विजय गुप्ता, दिनेश चौधरी तथा एक निजी व्यक्ति बंटी मिलकर यह अतिरिक्त वसूली कर रहे थे। आरोप है कि निजी व्यक्ति के माध्यम से 'फाइल चार्ज' के नाम पर धन लिया जाता था और बाद में यह राशि संबंधित कर्मचारियों तक पहुंचाई जाती थी। इससे ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले आवेदकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा था।


सीओ कुलदीप सिंह ने बताया कि प्राप्त तहरीर के आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 12 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एआरटीओ अमिताभ चतुर्वेदी ने कहा कि विभागीय स्तर पर भी मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।


शिकायत में एआरटीओ कार्यालय के आसपास सक्रिय बिचौलियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ लोग अतिरिक्त रकम लेकर लर्निंग लाइसेंस के लिए होने वाले ऑनलाइन टेस्ट की प्रक्रिया को प्रभावित करने तथा बिना परीक्षा के लाइसेंस बनवाने का दावा करते हैं। इतना ही नहीं, स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस भी मोटी रकम लेकर घर तक पहुंचाने की बात कही जाती है। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर सकता है। फिलहाल पुलिस और परिवहन विभाग दोनों स्तरों पर जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सके।

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