बरेली महानगर के चर्चित झुमका तिराहे पर भेलपूरी का ठेला लगाने वाली एक महिला ने सीबीगंज थाने में तैनात कुछ सिपाहियों पर प्रताड़ित करने और ठेला हटाने की धमकी देने का आरोप लगाया है। महिला ने अपनी आर्थिक परेशानियों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है।
भेलपूरी बेचकर जीवन यापन कर रही उक्त महिला की पहचान नूरबी के रूप में बताई गई है। नूरबी का कहना है कि उसके पति ने उसे छोड़ दिया है और वह पिछले छह वर्षों से कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रही है। महिला के अनुसार अपनी बच्ची के पालन-पोषण और घर का खर्च चलाने के लिए वह झुमका तिराहे पर भेलपूरी का ठेला लगाती है। आरोप है कि सीबीगंज थाने के कुछ सिपाही उसके ठेले पर भेलपूरी खाने आते हैं और उसे पैसे नहीं देते है। महिला के मुताबिक अन्य ग्राहकों की तरह भेलपूरी के पैसे मांगे जाने पर वे नाराज हो गए और उसे वहां ठेला नहीं लगाने देने की धमकी दी गई। महिला ने वीडियो में झुमका तिराहे के आसपास का क्षेत्र दिखाते हुए अपना पक्ष रखा। उसका कहना है कि वह केवल भेलपूरी बेचकर अपना और अपनी बच्ची का पालन-पोषण करती है तथा ठेले के आसपास साफ-सफाई का भी ध्यान रखती है। आसपास दिखाई दे रहे कचरे को लेकर उसने दावा किया कि वह कचरा उसके द्वारा नहीं फैलाया गया है।
नूरबी ने प्रशासन से उसके लिए एक स्थायी अथवा पक्की दुकान की व्यवस्था कराने की मांग की है। उसका कहना है कि यदि उसे स्थायी स्थान मिल जाए तो वह सम्मानपूर्वक अपना रोजगार जारी रखकर अपनी बच्ची का पालन-पोषण कर सकेगी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में नूरबी भावुक होकर अपनी आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों का जिक्र करती दिखाई दे रही है। वीडियो में वह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से मदद की अपील करती है। इसी दौरान वह रोजगार छिन जाने की स्थिति में अपनी बच्ची के साथ आत्महत्या करने की बात भी कहती है।
वीडियो में झुमका तिराहे का फव्वारा, आसपास की दुकानें और राहगीर दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, महिला द्वारा पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष और आरोपों की जांच के बाद सामने आने वाले तथ्य महत्वपूर्ण होंगे।
सीओ सेकेंड नितिन कुमार ने बताया कि महिला ने जो भी आरोप लगाए हैं, उनकी जांच की जाएगी। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
नोट: यह समाचार महिला द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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