उत्तर प्रदेश की पीलीभीत पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग ऐप और फर्जी इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए देश के कई राज्यों में साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार किये गए आरोपियो के कब्जे से लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड, एटीएम कार्ड, चेकबुक और बैंक पासबुक समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार अब तक की गयी जांच में गिरोह द्वारा 100 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी किए जाने की पुष्टि हुई है।सहायक पुलिस अधीक्षक सदर नताशा गोयल ने उक्त मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इस सम्बन्ध में जहानाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम गौनेरी निवासी दानिश अंसारी द्वारा गत 18 जुलाई को मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जहानाबाद कस्बा निवासी दो सगे भाइयों मोबिन और मोहसिन ने सरकारी योजनाओं का लाभ तथा 10 हजार रुपये इनाम दिलाने का झांसा देकर दानिश समेत कई लोगों के बैंक खाते खुलवाए थे। खाते खुलने के बाद आरोपियों ने एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और सिम अपने पास रख लिए। बाद में इन बैंक खाते पर होल्ड लगने के बाद पीड़ितों को ठगी का पता चला।
पुलिस की विवेचना मे सामने आया कि साइबर ठगी कर रहा ये गिरोह 47 बीईटी नामक गेमिंग वेबसाइट और फर्जी इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए लोगों को निशाना बनाता था। आरोपियों पर गेमिंग और निवेश में अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों से रकम ट्रांसफर कराने का आरोप है। ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में मंगवाने के बाद एटीएम से नकदी निकाली जाती थी।
पुलिस ने इस मामले मे गिरोह के मास्टरमांइड मोहसिन पुत्र मोहम्मद अमजद निवासी मोहल्ला विलई, जहानाबाद, पीलीभीत और राहुल पुत्र मेघनाथ निवासी हरवंशपुर लक्ष्मनियापुर, भोजीपुरा, बरेली को गिरफ्तार किया है। इनके पास से एक लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, आठ फर्जी आधार कार्ड, 10 एटीएम कार्ड, सात चेकबुक और 10 बैंक पासबुक बरामद होने की बात पुलिस ने कही है।
पुलिस द्वारा की गयी जांच मे पता लगा कि गिरोह के सदस्य सीधे-सादे और जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजना के नाम पर बैंक खाता खुलवाने के लिए तैयार करते थे। उन्हें 10 हजार रुपये मिलने का लालच दिया जाता था। खाता खुलने के बाद डेबिट कार्ड, पासबुक, आधार, पैन और सिम कार्ड अपने कब्जे में लेकर खाते का संचालन आरोपी करते थे। पुलिस के मुताबिक एक बैंक खाता उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति को करीब 30 हजार रुपये और ठगी की रकम पर एक से दो प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। बड़ी रकम के लेनदेन के लिए कई लोगों के चालू खाते भी खुलवाए गए थे।
पुलिस के अनुसार गिरोह से जुड़े खातों की जांच में कई राज्यों से साइबर ठगी की शिकायतें सामने आई हैं। अब तक प्राप्त आंकड़ों में गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों के लोगों से ठगी किए जाने की जानकारी मिली है।
पुलिस के मुताबिक हारून के खाते से जुड़ी शिकायतों में करीब 42 करोड़ 54 लाख रुपये, मोहसिन के खाते से करीब 32 करोड़ रुपये और राहुल के खाते से करीब 28 करोड़ रुपये की ठगी के लेनदेन की पुष्टि हुई है। अन्य खातों से जुड़ी शिकायतों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है। उपलब्ध डेटा के विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने गिरोह की कुल ठगी 100 करोड़ रुपये से अधिक होने की बात कही है।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरफ्तार किया गया आरोपी मोहसिन बरेली के एक नर्सिंग कॉलेज में जीएनएम प्रथम वर्ष का छात्र है। पुलिस के अनुसार उसकी ननिहाल भोजीपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम लखमनिया में है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि साइबर ठगी के तौर-तरीकों की जानकारी उन्हें अपने मामा तसलीम और नाना जमील से मिली थी। इसके बाद विशाल मौर्य, फरमान और राहुल समेत अन्य लोगों को जोड़कर नेटवर्क तैयार किया गया था। गिरोह के अन्य सदस्यो विशाल मौर्य और उसके साथी फरमान की तलाश जारी है। इन दोनों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।
दानिश अंसारी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज होने के बाद आरोपियों को पुलिस कार्रवाई का डर सताने लगा था। इससे बचने के लिया आरोपियो ने मोबाइल फोन तोड़कर फेंकने, सिम कार्ड जलाने और लैपटॉप व मोबाइल से डेटा डिलीट करने का प्रयास भी किया। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्यों के मोबाइल और डिजिटल डाटा का एक्सेस कथित तौर पर ऊपर बैठे हैंडलर के पास रहता था। किसी सदस्य के पकड़े जाने पर जीमेल और अन्य डिजिटल एक्सेस के जरिए डाटा डिलीट करने की कोशिश की जाती थी। पुलिस ने बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजकर डिलीट किए गए डाटा को रिकवर कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार बरामद फर्जी आधार कार्डों का इस्तेमाल नए सिम कार्ड निकलवाने, होटल में पहचान छिपाकर ठहरने और लोगों को झांसा देने के लिए किया जाता था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह के बैंकिंग नेटवर्क में कितने खाते और कितने लोग शामिल हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह की पूरी नेटवर्क चेन, कथित हैंडलरों और ठगी की रकम के आगे के लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक जहानाबाद जयशंकर सिंह, उपनिरीक्षक निशांत कुमार, अमर कुमार, देवेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल साइबर सेल अंकुर समेत अन्य पुलिसकर्मी और साइबर सेल की टीम शामिल रही।
