समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। जेल से रिहाई के बाद घर पहुंचने की उम्मीद लगाए बैठे आजम खां को शनिवार शाम नया झटका लगा, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने जेल के बाहर से ही उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बाद टीम उन्हें गाजियाबाद ले गई, जहां विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
इस घटनाक्रम के चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी आजम खां अपने घर नहीं पहुंच सके। जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में कथित तौर पर सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के बीच ईडी की कार्रवाई को उनके लिए एक और बड़ी कानूनी चुनौती माना जा रहा है। आजम खां शनिवार शाम जेल से बाहर आए ही थे कि बाहर मौजूद ईडी की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें गाजियाबाद ले जाकर विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत से न्यायिक हिरासत का आदेश मिलने के बाद उन्हें दोबारा जेल जाना पड़ा।
आजम खां के राजनीतिक जीवन में यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है, क्योंकि पहले जेल से रिहाई के बाद उन्हें घर जाने का अवसर मिल जाता था, लेकिन इस बार जेल के दरवाजे से बाहर निकलते ही नई कार्रवाई का सामना करना पड़ा। आजम खां के खिलाफ मुकदमों का सिलसिला वर्ष 2019 में शुरू हुआ था। पहली बार 26 फरवरी 2020 को उन्हें जेल जाना पड़ा। बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्रों समेत विभिन्न मामलों में वांछित होने के बाद आजम खां ने अपनी पत्नी तजीन फात्मा और बेटे के साथ रामपुर की अदालत में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में सीतापुर जेल भेज दिया गया। करीब 27 महीने जेल में रहने के बाद 20 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने पर उनकी रिहाई हुई थी।
इसके बाद 18 अक्टूबर 2023 को आजम खां को फिर जेल जाना पड़ा। यह मामला उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्रों से संबंधित था। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आजम खां, तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। सजा के बाद तीनों को जेल भेज दिया गया। बाद में तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम को जमानत मिल गई, जबकि आजम खां को जेल में रहना पड़ा। करीब 23 महीने बाद 23 सितंबर 2025 को उन्हें रिहाई मिली।
आजम खां की तीसरी जेल यात्रा 17 नवंबर 2025 को शुरू हुई। इस बार मामला बेटे अब्दुल्ला आजम के दो पैनकार्ड से जुड़ा था। रामपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने इस मामले में आजम खां और अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद पिता-पुत्र को जेल भेज दिया गया। अब ईडी की कार्रवाई के बाद आजम खां को एक बार फिर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इस तरह अलग-अलग मामलों में उनकी जेल यात्रा का सिलसिला आगे बढ़ गया है।
जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में कथित रूप से सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की जांच के तहत ईडी मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के अंतर्गत कार्रवाई कर रही है। इसी जांच के क्रम में जेल से रिहाई के तुरंत बाद आजम खां को हिरासत में लेकर अदालत में पेश किया गया। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के नतीजों से यह स्पष्ट होगा कि आजम खां को राहत कब मिल पाती है।
आजम खां की जेल यात्रा का इतिहास आपातकाल के दौर से भी जुड़ा है। इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते देश में लागू आपातकाल का विरोध करने के कारण उन्हें करीब 19 महीने जेल में बिताने पड़े थे। राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देख चुके आजम खां अब एक बार फिर कानूनी चुनौतियों से घिरे हैं। जेल से बाहर निकलने के तुरंत बाद हुई ईडी की कार्रवाई ने उनके समर्थकों के बीच भी चर्चा तेज कर दी है। फिलहाल उनकी अगली कानूनी राह अदालत की कार्यवाही और संबंधित मामलों में मिलने वाली राहत पर निर्भर करेगी।
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