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मंगलवार, नवंबर 03, 2026

देश अगले चुनाव में शांतिपूर्ण ढंग से भाजपा को सत्ता से बेदखल करने को तैयार है: Gehlot

जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर से रविवार को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हुई इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर बड़ा बयान दिया है। अशोक गहलोत ने एक्स के माध्यम से कहा कि सत्ता पक्ष को विपक्ष से सीखना चाहिए कि इतनी बड़ी भीड़ के साथ भी धैर्य से लोकतांत्रिक आंदोलन कैसे चलाया जाता है। लोकतंत्र की असली ताकत भीड़ का आकार नहीं, उसका संयम है।  राहुल गांधी के नेतृत्व में यही संयम अनुशासन बनकर दिख रहा है जो रैली के दौरान उन्होंने अपने विचारों में भी प्रकट किया है और देश अगले चुनाव में शांतिपूर्ण ढंग से भाजपा को सत्ता से बेदखल करने को तैयार है।

आज दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों में महंगाई, बेरोजगारी और नाउम्मीदी का गुस्सा सड़कों पर हिंसा बनकर उतर रहा है। यूरोप में फ्रांस, इटली, स्पेन, पुर्तगाल और अल्बानिया समेत कई देशों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। हमारे पड़ोसी नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में जनाक्रोश ने सरकारें तक गिरा दीं। नेपाल में तो संसद और सुप्रीम कोर्ट तक को आग के हवाले कर दिया गया। भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बावजूद भी सत्ता पक्ष विपक्ष को बदनाम करने में लगा है।

गहलोत ने कहा कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, पेपर लीक, जवाबदेही के अभाव और वोट चोरी जैसे मुद्दों को लेकर हमारे देश में भी लोगों के मन में सवाल और गुस्सा कम नहीं है। फर्क यह है कि यहां विपक्ष की कमान राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और इंडिया गठबंधन के हाथ में है, जो इस गुस्से को नफरत की नहीं, उम्मीद की राह दिखा रहे हैं।

पूर्व सीएम ने कहा कि जब देश में नफरत और तनाव का माहौल था, तब राहुल गांधी कन्याकुमारी से कश्मीर तक हजारों किलोमीटर पैदल चले और मोहब्बत व भाईचारे का संदेश देकर माहौल बदला। आज मुख्य चुनाव आयुक्त के कारनामों से आहत जनता में आक्रोश है, तब भी वे इस आक्रोश को शांति और संयम की राह पर रखे हुए हैं। रामलीला मैदान में उमड़ा जनसैलाब इसका गवाह है।

भाजपा की ऐसी हरकतें ही उसकी तानाशाही सोच उजागर करती हैं
गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में धरना-प्रदर्शन होते रहे हैं, पर ऐसा शायद पहली बार देखा गया कि विपक्ष की रैली के दिन ही सत्ताधारी पार्टी खुद सड़क पर उतरकर उसे उकसाने की कोशिश करे। फिर भी विपक्ष अपनी मर्यादा पर कायम रहा। यह कमजोरी नहीं, उस नेतृत्व की ताकत है जो मानता है कि बदलाव वोट और जनशक्ति से आता है, अराजकता से नहीं। भाजपा की ऐसी हरकतें ही उसकी तानाशाही सोच उजागर करती हैं। ऐसा वही करता है जो अपराधबोध से ग्रसित हो।

PC: abplive
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