जिला पीलीभीत के बीसलपुर थाना क्षेत्र से दहेज का सामान वापस दिलाने की मांग को लेकर एक विवाहिता द्वारा मोबाइल टावर पर चढ़ने का मामला प्रकाश मे आया है। महिला के टावर पर चढ़ने की खबर फैलते ही घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और महिला को समझाकर सुरक्षित नीचे उतारने का प्रयास शुरू किया।
ये घटना गोपी टॉकीज के पीछे स्थित मोबाइल टावर की बताई जा रही है। टावर पर चढ़ी महिला की पहचान मनीषा के रूप में हुई है। बताया गया कि मनीषा दियोरिया खुर्द निवासी धर्मेंद्र की पत्नी है और मूल रूप से पटेल नगर निवासी पूरनलाल की बेटी है।
मनीषा का आरोप है कि दहेज को लेकर ससुराल पक्ष से उसका विवाद चल रहा है। इस मामले में वह पहले ही बीसलपुर थाने में ससुरालियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा चुकी है। इसी विवाद के चलते वह आज मंगलवार को मोबाइल टावर पर चढ़ गई। महिला के टावर पर चढ़ने की सूचना मिलते ही बीसलपुर कोतवाल संजीव शुक्ला पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीएम नागेंद्र पांडे समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और महिला से बातचीत की।
मौके पर पहुंचे अधिकारियों के सामने महिला ने अपनी मांगें रखीं। उसने दहेज में दी गई ईको गाड़ी, जेवरात और अन्य सामान वापस कराने की मांग की। इसके अलावा दहेज से संबंधित दस्तावेज भी वापस दिलाए जाने की बात कही। टावर पर चढ़ी मनीषा ने अधिकारियों के सामने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने पति से अलग नहीं होना चाहती। उसका कहना था कि वह अपने पति के साथ रहना चाहती है और तलाक नहीं लेना चाहती। महिला की इस मांग के बाद पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने उससे बातचीत कर पूरे मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया।
घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने के कारण पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए स्थिति को संभाला। अधिकारियों ने महिला को समझाया और उसकी मांगों को सुनते हुए उसे सुरक्षित नीचे उतारने का प्रयास किया।थाना अध्यक्ष संजीव शुक्ला ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। महिला की ओर से पहले दर्ज कराए गए मुकदमे और उसकी शिकायत के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
दहेज विवाद को लेकर विवाहिता के मोबाइल टावर पर चढ़ने की घटना ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया। अब पुलिस और प्रशासन के सामने महिला की शिकायत एवं पहले से दर्ज मुकदमे के आधार पर विवाद का समाधान कराने की चुनौती है।


