पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार जारी है। आज मंगलवार को मेरठ में आयोजित अधिवक्ताओ की आम सभा में आंदोलन की आगामी रणनीति को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस सभा के दौरान अधिवक्ताओं ने निर्णय लिया कि अब भारतीय जनता पार्टी के सांसद, विधायक और मंत्रियों के कचहरी परिसर में प्रवेश का विरोध किया जायेगा। आम सभा मे यह भी तय किया गया कि मेरठ बार एसोसिएशन के किसी भी सदस्य के भाजपा से जुड़ा होने पर नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। स्पष्टीकरण मिलने के बाद उसके आधार पर सदस्यता समाप्त करने को लेकर कार्रवाई की जाएगी।
अधिवक्ताओं ने एमपी-एमएलए कोर्ट में जनप्रतिनिधियों की ओर से दाखिल किए गए वकालतनामे वापस लेने का भी निर्णय लिया। इसके अलावा कचहरी के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर हाईकोर्ट बेंच की मांग और आंदोलन से संबंधित बैनर लगाए जाने की बात कही गई। इस आंदोलन को लेकर बुधवार को संयुक्त व्यापार संघ के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी प्रस्तावित है। इसमें हाईकोर्ट बेंच की मांग से जुड़े मुद्दों के साथ ही आंदोलन के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी जाएगी।
आम सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ सोमवार को हुई अधिवक्ताओं की मुलाकात के दौरान सामने आए रुख पर भी चर्चा की गई। अधिवक्ताओं के अनुसार, मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट बेंच के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रास्ता अपनाने की बात कही थी। इसको लेकर अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने का निर्णय लिया।
हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने का कार्यक्रम आंदोलन का हिस्सा रहा है। इससे पहले 16 सितंबर को भी 22 जिलों के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया था।
अब बुधवार को भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहने की घोषणा की है। हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं का आंदोलन आगे भी जारी रखने की बात कही गई है।
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