रिपोर्ट - मुरादाबाद/उत्तर प्रदेश से जिला प्रभारी सत्यवीर यादव।

counter आज प्रदेश मे योगी आदित्यनाथ मुखिया के रूप मे आसीन है उनका अतीत एवं वर्तमान गायो की सेवा मे समर्पित है। योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की बागडोर सम्भालने के बाद से अब तक गायो की सुरक्षा हेतु अनेको प्रयास किये है, अनेको गौ आश्रम व ट्रस्टो की स्थापना की गयी है साथ ही गैर सरकारी संस्थाओ को भी इसके लिये अनुदान आदि देने के प्रावधान किये गये है। इस सबके बाद भी बड़े पैमाने पर गायो की दशा मे क्या कोई सुधार आ पाया है। इसका जबाब शायद नही ही होगा क्योकि आमतौर पर किसी भी कस्बे अथवा शहर मे अनेको स्थानो पर गायो को घूमते व भोजन की तलाश मे कूड़े के ढेरो मे भोजन तलाशते देखा जा सकता है।
counter आज प्रदेश मे योगी आदित्यनाथ मुखिया के रूप मे आसीन है उनका अतीत एवं वर्तमान गायो की सेवा मे समर्पित है। योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की बागडोर सम्भालने के बाद से अब तक गायो की सुरक्षा हेतु अनेको प्रयास किये है, अनेको गौ आश्रम व ट्रस्टो की स्थापना की गयी है साथ ही गैर सरकारी संस्थाओ को भी इसके लिये अनुदान आदि देने के प्रावधान किये गये है। इस सबके बाद भी बड़े पैमाने पर गायो की दशा मे क्या कोई सुधार आ पाया है। इसका जबाब शायद नही ही होगा क्योकि आमतौर पर किसी भी कस्बे अथवा शहर मे अनेको स्थानो पर गायो को घूमते व भोजन की तलाश मे कूड़े के ढेरो मे भोजन तलाशते देखा जा सकता है।
आज ऐसे ही दो मामले सामने आये है मुरादाबाद महानगर से जहॉ आज सुबह एक गाय देहरी गॉव मोड़ के पास एक नाले मे गिर गयी। काफी मशक्कत के बाद मौके पर जुटी स्थानीय निवासियों की भीड़ ने इस गाय को नाले से बाहर निकाला तथा प्राथमिक उपचार दिया। अनुमान है कि यह गाय भी किसी डेयरी संचालक की है जो सुबह शाम दुध निकालने के बाद इसे सड़को पर छोड़ देता है। जानकारी करने के बाद भी इस बारे मे कोई सटीक जानकारी नही मिल सकी कि इसका स्वामी है कौन। स्थानीय निवासियो ने नगर निगम की गाड़ी को बुलाकर गाय उनको सौंप दी।
दूसरा मामला है गोविन्द नगर रेलवे क्रॉसिंग के पास का जहॉ एक गाय अज्ञात वाहन की चपेट मे आकर चोटिल हो गयी। इसे भी स्थानीय निवासियो ने प्राथमिक उपचार दिया। गाय के घावो को साफ किया गया व मरहम पटटी की गयी। यहॉ मौजूद स्थानीय लोगो की भीड़ के दबाब के चलते डेयरी संचालक की पत्नी मौके पर तो पहुॅच गयी परन्तु कैमरे के सामने आने पर काफी देर तक यह मानने को तैयार नही हूई कि यह गाय उन्ही की है। स्थानीय निवासियो के बार बार कहने पर यह स्वीकार किया कि गाय उन्ही की है।
शासन स्तर गौरक्षा के लिये जो भी प्रयास किये जा रहे है सभी सराहनीय है परन्तु एक प्रश्न यह उठता है कि उन लोगो की मानसिकता बदलने हेतु कोई कदम क्यो नही उठाया जा रहा जो केवल गायो को दुध उत्पादन का एक केन्द्र मान रहे है। जी हॉ ऐसे लोगो मे महज डेयरी संचालक ही नही वरन ऐसे लोग भी मिल जायेंगे जिन्होने अपनी घरेलू दुध की जरूरत पूरी करने हेतु गायो को पाला हुआ है। सुबह व शाम को दुध निकालकर गायो को खुला सड़को पर छोड़ दिया जाता है। यह कहना उचित ही होगा कि केवल कानून बनाने मात्र से किसी समस्या का हल नही निकाला जा सकता वरन आवश्यकता है उसको प्रभावी रूप से अमल मे लाने की एवं आम आदमी को जागरूक बनाने की।
