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बुधवार, जून 10, 2026

बिजनौर/उत्तर प्रदेश - जिला अस्पताल मे तीमारदारो ने किया हंगामा, डॉक्टर पर लगाया बाहर से दवा मंगाने का गंभीर आरोप

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चित्र को प्रभावी बनाने हेतु एआई का प्रयोग किया गया है। 
आज बुधवार को बिजनौर के जिला मेडिकल अस्पताल मे हुई एक घटना  ने उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त इलाज और दवाएं देने के बड़े-बड़े दावों पोल खोल कर रख दी है।  जिला मेडिकल अस्पताल में आज बुधवार को उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब इलाज में घोर लापरवाही और बाहर से महंगी दवाएं लिखे जाने को लेकर डॉक्टर और मरीज के परिजन आपस में भिड़ गए।  दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और जमकर बवाल काटा गया।  मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने तुरंत उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बढ़ापुर थाना क्षेत्र के गाँव हमजापुर की निवासी गजरो देवी पिछले 2 दिन से अस्पताल में भर्ती है।  गजरो देवी का उपचार  डॉ.  राजेश कुमार डाबरे व डॉ.  अबू हाशिम की देखरेख में चल रहा है।  आज सुबह से ही गजरो देवी की हालत काफी नाजुक बनी हुई थी।  करीब साढ़े ग्यारह बजे जब अधिक तबियत बिगड़ने पर परिजनों ने वार्ड में मौजूद स्टाफ नर्स से डॉक्टर को बुलाने की गुहार लगाई।  आरोप है कि नर्स ने तुरंत ही डॉ.  अबू हाशिम को फोन किया मगर उन्होंने आने से साफ इनकार कर दिया।

परिजनों का आरोप है कि कुछ समय बाद जब डॉ.  हाशिम रूटीन चेकअप के लिए वार्ड में पहुंचे मगर उन्होंने फिर भी तड़प रही मरीज गजरो देवी को देखना भी मुनासिब नहीं समझा।  इतना ही नहीं उन्होंने फोन करने पर स्टाफ नर्स को बुरी तरह फटकार लगाई और भविष्य में दोबारा फोन न करने की चेतावनी देते हुए वहां से पैर पटकते हुए चले गए।  डॉक्टर के इस अमानवीय रवैये को देखकर तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया।

चिकित्सक की इस अमानवीय हरकत पर भड़के तीमारदारों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।  परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मिलने वाली मुफ्त दवाओं के स्थान पर डॉक्टर लगातार बाहर के मेडिकल स्टोरों से महंगी दवाइयां लिख रहे हैं।  एक बार में ₹1000 की दवा बाहर से मंगवाने के बाद डॉक्टरों ने दोबारा फिर से बाहर की दवा का पर्चा थमा दिया।  परिजनो का कहना था कि सरकारी अस्पताल में सिर्फ औपचारिकता पूरी की जा रही है, जबकि इलाज का असली खर्च गरीब मरीजों की जेब से कराया जा रहा है।


दूसरी ओर आरोपी चिकित्सक डॉ.  अबू हाशिम ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।  उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को अस्पताल के अंदरूनी राजनीतिक गठजोड़ का हिस्सा बताया।  डॉ.  अबू हाशिम ने कहा कि यह सारा मामला वार्ड बॉय और सिस्टर द्वारा मिलकर बनाया गया है।  मैं नीट पीजी के माध्यम से ऑल इंडिया रैंक लाकर यहां आया हूं और मैंने अस्पताल में क्वालिटी केयर'को बढ़ाया है।  जिला अस्पताल के स्टाफ की पुरानी आदत है कि वे खुद काम नहीं करते और अपने सारे काम वार्ड बॉय और स्वीपर से करवाते हैं।  यहाँ का स्टाफ मरीजों के साथ भी बदसलूकी करता है, जिसका मैं विरोध करता हूँ।

इस खींचतान के बीच डॉक्टर और नर्स दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ प्राचार्य और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से लिखित शिकायत की है।  इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर तुहिन वशिष्ट ने स्थिति स्पष्ट की है।  उन्होंने कहा कि दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं और एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।  मामले की निष्पक्षता से जांच के लिए सीएमएस के नेतृत्व में एक विशेष जांच कमेटी का गठन किया जा रहा है।  जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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