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गुरुवार, जून 04, 2026

बिजनौर/उत्तर प्रदेश - 3 महीने से मानदेय को तरस रहे संविदाकर्मियो ने किया कलेक्ट्रेट का घेराव, जिलाधिकारी को दिया ज्ञापन

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जिला बिजनौर के शिक्षा विभाग मे तैनात संविदाकर्मियों के सब्र का बाँध आखिरकार टूट ही गया। पिछले कई माह से मानदेय न मिल पाने के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे संविदाकर्मियो ने आज गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर मे एकत्र होकर जोरदार  प्रदर्शन किया। 'ए टू जेड मल्टी सर्विस एंड आईटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड' एजेंसी के तहत काम कर रहे इन कर्मचारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द भुगतान कराने की गुहार लगाई है।


पिछले कई माह से मानदेय न मिलने पर आर्थिक व अनेक परेशानियो से जूझ रहे संविदाकर्मियो ने आज गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर मे एकत्र हो जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान ठेका एजेंसी और शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि वे बिजनौर के विभिन्न राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में तैनात हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें मार्च से लेकर मई तक का मानदेय नहीं दिया गया है। तीन महीने से जेब खाली है। घर में राशन खत्म हो रहा है और बच्चों के स्कूलों से फीस के लिए लगातार नोटिस आ रहे हैं। हमारे सामने भुखमरी की नौबत आ गई है, लेकिन हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है।


प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि उनके मामूली वेतन से हर महीने भविष्य निधि की राशि तो काटी जाती है, लेकिन वह पैसा उनके पीएफ खातों में समय पर जमा नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों ने आशंका जताई है कि उनके पीएफ के पैसे में बड़ी हेराफेरी की जा रही है, जिसकी जांच होनी बेहद जरूरी है।


इस बड़े विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से तरुण कुमार, नवनीत कुमार, सोनू कुमार, कपिल कुमार, सचिन कुमार, विजेंद्र कुमार, अरविंद कुमार, सहदेव, यशपाल, नरेश, नितिन कुमार, महिपाल, आलोक कुमार, अमित कुमार, रजनीश कुमार, चंद्र मोहन, रोहित, संदीप, ज्योति, अमर, गौरव, दीपक, आशीष, सिकंदर, फतेह सिंह, बिजेंद्र और आलोक समेत सैकड़ों की संख्या में पीड़ित आउटसोर्स कर्मचारी मौजूद रहे। कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनके तीन महीने के बकाए वेतन का भुगतान नहीं हुआ और पीएफ खाते की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में ठेका कंपनी पर क्या कार्रवाई करता है।

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