पंजाब नेशनल बैंक प्रबंधन को उपभोक्ता अधिकारों की अनदेखी करना भारी पड़ गया है। संभल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक मामले मे कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब नेशनल बैंक के चेयरमैन और स्थानीय शाखा प्रबंधक की गिरफ्तारी के आदेश दिए है। यह सख्त आदेश एक उपभोक्ता के खाते धोखाधड़ी कर निकाली गयी रकम और ब्याज वापस न करने तथा आयोग के पुराने फैसलों की अवहेलना करने पर दिया गया है।
उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के अनुसार यह मामला संभल के कोतवाली कस्बा क्षेत्र (कोट पूर्वी) के निवासी डॉ. रितेश कुमार से जुड़ा है। डॉ. रितेश का एक बचत खाता संभल स्थित पीएनबी की शुक्ला मार्केट शाखा में था। घटना 25 मई 2019 की शाम करीब 7:33 बजे की है, जब डॉ. रितेश के मोबाइल पर एक एसएमएस आया। इस मैसेज में जानकारी दी गई कि उनके खाते से ₹65,026 की राशि निकाल ली गई है।धोखाधड़ी का एहसास होते ही डॉ. रितेश ने मुस्तैदी दिखाई और तुरंत कस्टमर केयर के टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके अपना खाता ब्लॉक कराया। इसके बाद उन्होंने पुलिस को तहरीर दी और शाखा प्रबंधक से मिलकर शिकायत दर्ज कराई।
उक्त मामले की शुरुआती जांच में सामने आया कि उसी दिन बैंक के कुछ कर्मचारियों ने डॉ. रितेश के खाते से ₹50,000 निकालने की कोशिश की थी, जिसमें से वे ₹25,000 निकालने में सफल रहे थे। इसके कुछ ही देर बाद योजनाबद्ध तरीके से खाते से कुल ₹65,026 उड़ा लिए गए।
पीड़ित खाताधारक ने बैंक प्रबंधन से न्याय और पैसे वापस करने की गुहार लगाई, लेकिन अधिकारियों ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। कोई रास्ता न देख डॉ. रितेश ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक की लापरवाही मानते हुए पीएनबी के चेयरमैन और शाखा प्रबंधक को आदेश दिया कि वे पीड़ित को ₹65,026 की मूल राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाएं। इसके अलावा ₹5,000 का वाद व्यय (कानूनी खर्च) देने का भी निर्देश दिया गया। जिला आयोग के इस फैसले के खिलाफ बैंक प्रबंधन ने राज्य उपभोक्ता आयोग, लखनऊ में अपील दायर की। लेकिन राज्य आयोग ने बैंक की दलीलों को खारिज करते हुए जिला अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
राज्य आयोग से अपील खारिज होने के बाद भी पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों ने उपभोक्ता को उसकी राशि नहीं लौटाई और कोर्ट के आदेश को हल्के में लिया। अदालत के आदेश की इस कदर अनदेखी पर संभल जिला उपभोक्ता आयोग ने कड़ा रुख अपनाया और अब पीएनबी के चेयरमैन व शाखा प्रबंधक को गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने का फरमान जारी कर दिया है।
उपभोक्ता मामलों के जानकारों का कहना है कि यह ऐतिहासिक फैसला उन बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए एक कड़ा सबक है जो ग्राहकों के अधिकारों और अदालती आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते हैं।
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