जिला पीलीभीत के गजरौला थाना क्षेत्र के एक ग्राम प्रधान पर सरकारी आवास दिलाने के नाम पर 18 हजार रूपये लेने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि आवास न मिलने पर पैसा वापस मांगे जाने पर ग्राम प्रधान व उसके पुत्रो ने गाली गलौज व मारपीट भी की। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि इस दौरान बुजुर्ग का गला दबाकर जान से मारने का प्रयास भी किया गया। पीड़ित पक्ष ने पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की गई है।
ग्राम उगनपुर निवासी विपिन कुमार का कहना है कि करीब 3 वर्ष पहले उनके पिता सम्मेर लाल ने सरकारी आवास के लिए ग्राम प्रधान ओमकार से संपर्क किया था। आरोप है कि प्रधान ने आवास दिलाने के एवज में 30 हजार रुपये की मांग की थी। इसके बाद सम्मेर लाल ने 18 हजार रुपये दे दिए, लेकिन काफी समय बीतने के बावजूद उन्हें सरकारी आवास नहीं मिल सका।
पीड़ित पक्ष के मुताबिक आवास न मिलने पर रकम वापस करने हेतु कई बार ग्राम प्रधान से संपर्क किया, लेकिन हर बार टालमटोल की जाती रही। विपिन कुमार के अनुसार आज सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे उनके पिता सम्मेर लाल अपनी रकम वापस मांगने ग्राम प्रधान के घर पहुंचे थे। आरोप है कि वहां ग्राम प्रधान ओमकार और उनके पुत्र हुकम सिंह व चंद्रसेन ने उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि विरोध करने पर आरोपियों ने सम्मेर लाल के साथ मारपीट की और गला दबाकर जान से मारने का प्रयास किया। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह बीच-बचाव कर उन्हें बचाया।
घटना की सूचना मिलते ही विपिन कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने अपने पिता की हालत गंभीर देखते हुए एंबुलेंस की मदद से उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने थाना गजरौला में तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की। साथ ही कथित तौर पर दी गई 18 हजार रुपये की रकम वापस दिलाने की भी मांग की गई है।
उक्त मामले मे जानकारी करने पर ग्राम प्रधान ओमकार ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। प्रभारी निरीक्षक कोतवाली गजरौला ब्रजवीर सिंह ने बताया कि पीड़ित पक्ष की ओर से तहरीर प्राप्त हुई है। मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नोट: सरकारी आवास के नाम पर रकम लेने, मारपीट और जान से मारने के प्रयास के आरोप पीड़ित पक्ष की शिकायत पर आधारित हैं। पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
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