एसएसपी कार्यालय पहुंची युवती ने बताया कि वह अनुसूचित जाति से है और बीए की पढ़ाई कर रही है। उसका दावा है कि वह अपने गांव निवासी अरमान के साथ लंबे समय से रिश्ते में है। परिवार को जब दोनों के संबंध की जानकारी हुई तो उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। युवती के अनुसार गत 21 जुलाई को मां के साथ हुए विवाद के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद चाचा ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया था। युवती का आरोप है कि उपचार के दौरान खरखौदा पुलिस वहां पहुंची और उस पर अरमान के खिलाफ बयान देने का दबाव बनाया। युवती ने आरोप लगाया कि पुलिस के दबाव के कारण वह घबरा गई थी और अपनी इच्छा के विपरीत अरमान के खिलाफ बयान दे दिए। उसका दावा है कि अस्पताल से घर लौटने के बाद भी उसे खरखौदा थाने बुलाया गया और उस पर दबाव बनाया गया। युवती ने यह भी आरोप लगाया कि वह अदालत में जाकर अपनी बात रखना चाहती थी, लेकिन उसे ऐसा करने का अवसर नहीं दिया गया।
युवती ने खरखौदा थाने के एक दरोगा पर भी आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि उसके नाम से दर्ज किए गए बयान पहले से लिखे गए थे और उसे वही बातें कहने के लिए मजबूर किया गया। युवती ने पुलिसकर्मी द्वारा धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की अभी किसी प्रकार भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवती के आरोपों में कितनी सच्चाई है। युवती का आरोप है कि अस्पताल से लौटने के बाद परिवार ने उसे घर में ही रोककर रखा। उसने कहा कि वह अरमान से शादी करना चाहती है, लेकिन परिवार इसके लिए तैयार नहीं है। युवती के मुताबिक किसी तरह घर से निकलकर वह आज एसएसपी कार्यालय पहुंची और अधिकारियों से सुरक्षा की मांग की। उसने आशंका जताई कि परिवार के पास वापस जाने पर उसकी जान को खतरा हो सकता है।
युवती के नए बयान के बाद अब मामले की दिशा बदल गई है। पहले जहां अरमान पर युवती को परेशान करने सहित कई आरोप सामने आए थे, वहीं अब युवती खुद उन आरोपों को गलत बता रही है। साथ ही उसने परिवार और पुलिस पर दबाव बनाकर बयान दिलवाने का आरोप लगाया है। अब पुलिस के सामने यह जांच करना अहम होगा कि युवती के पहले बयान किन परिस्थितियों में दर्ज हुए थे और अब लगाए गए दबाव के आरोपों में कितनी सच्चाई है। साथ ही युवती की सुरक्षा संबंधी शिकायत को भी गंभीरता से देखना होगा।
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