प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला अमरोहा के गाँव कारहट उर्फ़ रामहट की निवासी साहिबा आज गुरुवार सुबह करीब 6:45 बजे नौवीं वाहिनी पीएसी के मैदान में प्रवेश करने पहुंची थी। उसने मुख्य गेट पर तैनात कर्मचारियों को अपना प्रवेश पत्र दिखाया। दस्तावेजों की जांच के दौरान चेकिंग स्टाफ की नजर एडमिट कार्ड पर दर्ज अनुक्रमांक (रोल नंबर) पर पड़ी। नियमानुसार अनुक्रमांक 10 अंकों का होना चाहिए था, जबकि युवती के प्रवेश पत्र पर केवल नौ अंक दर्ज थे। इस विसंगति के बाद अधिकारियों को प्रवेश पत्र की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ। पूछताछ और जांच के दौरान कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया।
पुलिस पूछताछ में युवती ने स्वीकार किया कि वह सिपाही भर्ती की लिखित परीक्षा में सफल नहीं हो सकी थी। इसके बावजूद शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने के लिए उसने फर्जी प्रवेश पत्र का सहारा लिया। युवती के अनुसार बरेली निवासी उसकी सहेली अस्मिता मलिक के भाई कादिर हुसैन ने इस काम में उसकी मदद की थी। आरोप है कि भारतीय सेना में तैनात कादिर हुसैन ने लिखित परीक्षा में सफल दर्शाते हुए एडिटिंग के माध्यम से प्रवेश पत्र तैयार किया और उसे व्हाट्सएप पर भेज दिया। युवती ने उसका प्रिंट निकलवाया और उसी के आधार पर परीक्षा स्थल पर पहुंच गई।
मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने कुमारी साहिबा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने युवती के साथ कथित तौर पर फर्जी प्रवेश पत्र तैयार करने में मदद करने के आरोप में सैन्यकर्मी कादिर हुसैन के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है। बताया गया है कि कादिर हुसैन वर्तमान में लद्दाख में तैनात है।
पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की जांच कर रही है। इस घटना ने भर्ती प्रक्रिया में प्रवेश पत्रों के सत्यापन और दस्तावेजों की जांच की अहमियत को एक बार फिर उजागर किया है।
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