रिपोर्ट - मुरादाबाद/उत्तर प्रदेश से जिला प्रभारी - सत्यवीर यादव।
आज हम आपको मुरादाबाद महानगर की ऐसी समस्याओ से रूबरू करायेंगे जिनकी गिरफत मे यह शहर वैसे तो वर्षो से रहा है पर कुछ वर्षो पूर्व स्मार्ट सिटी की कतार मे आने के बाद एक आस यह जगी थी कि अब शायद शहर की सड़को पर जमे अवैध अतिक्रमण और मुख्य मार्गो पर होने वाले यातायात जाम से छुटकारा मिल सकेगा। आम आदमी ने इसी आस मे काफी समय गुजार दिया कि कभी तो विश्व मे पीतल के कारोबार का डंका बजा चुके इस शहर की पहचान साफ सुथरे और अनुशासित शहरो मे भी होगी, परन्तु खेद कि आज भी आप मुरादाबाद मे किसी भी दिशा से प्रवेश कर लें आपको अतिक्रमण और अतिक्रमण के कारण हो रहे यातायात के जाम से दो चार होना ही पड़ेगा।
आज हम आपको मुरादाबाद महानगर की ऐसी समस्याओ से रूबरू करायेंगे जिनकी गिरफत मे यह शहर वैसे तो वर्षो से रहा है पर कुछ वर्षो पूर्व स्मार्ट सिटी की कतार मे आने के बाद एक आस यह जगी थी कि अब शायद शहर की सड़को पर जमे अवैध अतिक्रमण और मुख्य मार्गो पर होने वाले यातायात जाम से छुटकारा मिल सकेगा। आम आदमी ने इसी आस मे काफी समय गुजार दिया कि कभी तो विश्व मे पीतल के कारोबार का डंका बजा चुके इस शहर की पहचान साफ सुथरे और अनुशासित शहरो मे भी होगी, परन्तु खेद कि आज भी आप मुरादाबाद मे किसी भी दिशा से प्रवेश कर लें आपको अतिक्रमण और अतिक्रमण के कारण हो रहे यातायात के जाम से दो चार होना ही पड़ेगा।
यह इस शहर की बदकिस्मती ही कही जायेगी कि तमाम बड़े अस्पताल, स्कूल - कॉलेज एवं विश्वविद्यालय तक यहॉ उपलब्ध है और हो भी क्यो न क्योकि यह शहर मन्डल मुख्यालय जो है, परन्तु यदि आसपास के क्षेत्रो व शहरों से किसी मरीज को आपातकाल मे मुरादाबाद रेफर किया जाता है तो बड़ी मुश्किलों का सामना करने के बाद ही वह अस्पताल तक पहुॅच पाता है। यातायात जाम का कारण यदि अतिक्रमण को मान लिया जाये तो यह सोचना होगा कि आखिर नगर निगम एवं प्रशासन के उच्च अधिकारियों के मौजूद होने के बावजूद भी यह अतिक्रमण हो क्यो रहा है और यदि हो भी रहा है तो उस पर नियन्त्रण क्यो नही किया जा रहा है। आप रामपुर की ओर से रामगंगा पुल को पार कर शहर मे प्रवेश करे और शुरूआत मे ही गुलाबबाड़ी चुॅगी पर अतिक्रमण उसके बाद हनुमान मूर्ति तिराहे पर पुलिस कर्मियो को भारी वाहनो को शहर मे प्रवेश कराते देख ही समझ जायेंगे कि अन्दर के हालात क्या होंगे। यदि आप कॉठ रोड से आते है तब भी हरथला मे लगने वाला जाम अब वहॉ से गुजरने वाले हर राहगीर के लिये यादगार बनता जा रहा है। यही हालात आपको नवीन नगर चौराहा, पीएसी, पीली कोठी चौराहा पर मिलेगे। यदि कलेक्ट्रेट का रूख किया जाये तो वहॉ भी अनाधिकृत अतिक्रमण पैर पसारे जोर शोर से जमा खड़ा है जबकि कलेकट्रेट के पास ही जिला न्यायालय स्थित है, यह शहर का सबसे अच्छा क्षेत्र माना जाता है परन्तु आज भी आड़े तिरछे खडे़ वाहन एवं धड़ल्ले से चल रहे ई रिक्शा इस क्षेत्र मे देखे जा सकते है।
अब प्रश्न यह उठता है कि यदि आज हालात यह है तो ये शहर कब स्मार्ट सिटी बन पायेगा जहॉ वाहनो की पार्किंग का स्थान निर्धारित होगा, जहॉ अतिक्रमण नही होगा, जहॉ यातायात जाम नही होगा। अभी तो प्रशासन की ओर से इसके लिये कोई ऐसा कदम नही उठाया गया है जो आम आदमी की रोजमर्रा की जिन्दगी को कुछ आसान बना दे। यदि ऐसे ही समय गुजरता रहा तो एक दिन ये सवाल मुरादाबाद का नागरिक ही नही बल्कि वहॉ आने वाला हर शख्स पूछेगा कि क्या स्मार्ट सिटी ऐसे ही होते है।
