जिला बिजनौर की नहटौर नगरपालिका परिषद में पिछले तीन दिनों से चल रहा आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों का धरना आज गुरुवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। सफाई कर्मचारी अपनी 16 सूत्रीय मांगों को लेकर नगरपालिका कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें धरातल पर पूरी नहीं होतीं, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
धरनारत सफाई कर्मचारियों ने 'राष्ट्रीय दलित पिछड़ा वर्ग भारत' संगठन के बैनर तले अधिशासी अधिकारी ओम गिरी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियो ने वेतन वित्तीय पारदर्शिता और कार्यस्थल पर सम्मानजनक परिस्थितियों का मुद्दा उठाया है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनके वेतन से पीएफ और ईएसआई का पैसा नियमित रूप से काटा जा रहा है, लेकिन उन्हें इसका कोई विवरण या रसीद नहीं मिल रही है। कर्मचारियों ने संबंधित ठेकेदार और कंपनी के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। कर्मचारियों ने सभी स्थाई, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की आधिकारिक वेतन सूची सार्वजनिक किये जाने व लंबे समय से अटके हुए वेतन का तत्काल भुगतान किये जाने की मांग की है। इसके साथ ही महिला सफाई कर्मियों की कार्य परिस्थितियों में सुधार किये जाने व इनके काम के समय व स्थान मे बदलाव की भी मांग की गयी है। कर्मचारियो का कहना है कि कचरा उठाने और सफाई के लिए आवश्यक आधुनिक संसाधन और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही सफाई नायकों को पुनः मुख्य सफाई कार्य पर लगाया जाए और शहर की आबादी के हिसाब से कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए।
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से यह शर्त भी रखी है कि शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे इस धरना-प्रदर्शन में शामिल किसी भी कर्मचारी के खिलाफ भविष्य में कोई दंडात्मक, विभागीय या दमनकारी कार्रवाई नहीं की जाएगी। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने रोष जताते हुए कहा कि वे रात-दिन शहर को साफ रखने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, लेकिन जब उनके मूलभूत अधिकारों, वेतन और सुरक्षा की बात आती है, तो प्रशासन और ठेकेदार आंखें मूंद लेते हैं।
इस पूरे गतिरोध और हड़ताल को लेकर नहटौर नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी ओम गिरी का बयान भी सामने आया है। ईओ ओम गिरी ने इस मामले पर रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रशासन कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है, लेकिन नियमों के दायरे में आने वाली केवल जायज मांगें ही पूरी की जा सकती हैं।
बहरहाल, तीसरे दिन भी सफाई व्यवस्था ठप होने और कर्मचारियों के अड़े रहने से नहटौर कस्बे में सफाई व्यवस्था चरमराने की आशंका पैदा हो गई है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद इस गतिरोध का क्या समाधान निकलता है।
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