आज बुधवार की सुबह नवीन मंडी स्थल तिलहर मे हुए दर्दनाक हादसे मे 42 वर्षीय पल्लेदार की मौत हो गयी। यहाँ मंडी में काम कर रहा पल्लेदार धान लेकर मंडी पहुंची एक ट्रैक्टर ट्राली की चपेट में आ गया। साथी की मौत पर आक्रोशित हुए अन्य पल्लेदारो ने मंडी का मेन गेट बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। करीब तीन घंटे एक चले इस हंगामे के कारण मंडी के बाहर वाहनों की लंबी कतार लग गई और लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर भी यातायात प्रभावित हुआ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कस्बा तिलहर के इमली मोहल्ला निवासी 42 वर्षीय फुरकान नवीन मंडी समिति में पल्लेदारी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। बुधवार सुबह करीब पांच बजे वह रोजाना की तरह काम के लिए मंडी पहुंचे थे। इसी दौरान मंडी परिसर में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली आगे-पीछे हो रही थी। बताया जा रहा है कि इसी दौरान फुरकान उसकी चपेट में आ गए। ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की जानकारी मिलते ही मंडी में काम करने वाले अन्य पल्लेदारों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने घटना को लेकर नाराजगी जताते हुए मंडी का गेट बंद कर दिया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन कर रहे पल्लेदारों ने मंडी के सुरक्षा गार्डों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि हादसे के बाद संबंधित चालक को पकड़ने के लिए उचित कार्रवाई नहीं की गई। घटना से नाराज मजदूरों ने मंडी के गेट पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी कर आवागमन रोक दिया। पल्लेदारों के विरोध के चलते मंडी में धान की खरीद और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। धान लेकर पहुंचे किसानों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। मंडी का गेट बंद होने से बाहर धान से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की करीब दो किलोमीटर लंबी कतार लग गई। वाहनों का दबाव बढ़ने से शाहजहांपुर से बरेली की ओर जाने वाले लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर जाम की स्थिति बन गई। सड़क पर वाहनों की लंबी कतार के कारण राहगीरों और अन्य वाहन चालकों को निकलने में काफी दिक्कत हुई।
हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शन कर रहे मजदूरों को समझाने का प्रयास किया। मंडी के व्यापारियों ने भी पल्लेदारों से बातचीत कर स्थिति सामान्य करने की कोशिश की। करीब तीन घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद मजदूर शांत हुए और मंडी का गेट खोल दिया गया। इसके बाद वाहनों की आवाजाही दोबारा शुरू हुई और हाईवे पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य होने लगा।
इस हादसे ने मंडी परिसर में सुरक्षा इंतजामों और वाहनों की आवाजाही के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, साथी पल्लेदार की मौत से मजदूरों में शोक और नाराजगी का माहौल रहा।
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