रिपोर्ट - नहटौर/बिजनौर से सॅवाददाता मोहित शर्मा।
बीती रात लगभग साढे 10 बजे के करीब नगर के मौहल्ला हाथी वाला मन्दिर के निवासी इन्तजार अली के परिवार को न जाने किसकी नजर लगी कि ईद की खुशियॉ घर मे आती उस से पहले ही घर का चिराग बुझ गया। इन्तजार अली का बेटा समद ंिफ्रज मे पानी की बोतल रखने गया था। फ्रिज की बॉडी मे आ रहा करंट लग जाने के कारण वह अचेत हो गया। समद को बचाने आयी उसकी मॉ को भी करंट लगा। समद के अचेत हो जाने पर उसे स्थानीय चिकित्सक के पास ले जाया गया, परन्तु वहॉ उपचार नही मिल सका। नगर के एक बड़े निजी चिकित्सालय मे भी उसको ले जाया गया, परन्तु वहॉ से भी कोई राहत नही मिल सकी।
अन्त मे समद के परिजन निजी चिकित्सको के परामर्श के अनुसार उसको लेकर सरकारी अस्पताल पहुॅचे। सरकारी अस्पताल मे भी काफी देर चिकित्सक को तलाशा मगर कोई भी चिकित्सक डयूटी पर नही मिला। केवल एक सहायक ही मिल पाया और उसने भी यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि कही और ले जाओ यहॉ इस समय उपचार नही हो सकता है। परिजनों के अनुसार तब तक समद की सॉसे चल रही थी। परिजनो का कहना है कि यदि समद को प्राथमिक उपचार मिल गया होता तो उसकी जान बच सकती थी। अन्त मे परिजन निराश हो समद को लेकर धामपुर के लिये रवाना हो गये, परन्तु काफी देर हो चुकी थी और समद ने धामपुर पहुॅचने से पहले ही दम तोड़ दिया।
समद की मौत ने जहॉ उसके परिवार को गहरे सदमे मे ला दिया है वही सरकारी व गैर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओ पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। सरकारी अस्पताल जहॉ आपात स्थिति मे दूर दराज क्षेत्रों से मरीजो का समय असमय आना होता रहता है क्या वहॉ किसी चिकित्सक का न मिलना लापरवाही की ओर इशारा नही करता है। दूसरी और बड़े बड़े आलीशान इमारतो मे चल रहे निजी चिकित्सालय भी क्या किसी आपात स्थिति से निपटने मे सक्षम है। शायद नही उपरोक्त घटनाक्रम को देखकर तो यही प्रतीत होता है।
सरकारी लापरवाही व चिकित्सको की उदासीनता के चलते समद तो मौत की नींद सो गया पर अपने पीछे कई ऐसे सवाल छोड़ गया जिनका जबाब शायद ही मिल सके।
