Rajasthan: अब इन मामलों में नहीं मिलेगी कारावास की सजा, भजनलाल सरकार ने 11 अधिनियमों में से आपराधिक प्रावधान हटाए - News India 17 # खबर देश की - नजर दुनिया की #

Breaking


शनिवार, दिसंबर 13, 2025

Rajasthan: अब इन मामलों में नहीं मिलेगी कारावास की सजा, भजनलाल सरकार ने 11 अधिनियमों में से आपराधिक प्रावधान हटाए

जयपुर। राजस्थान में अब 11 विभिन्न अधिनियमों में मामूली उल्लंघन या तकनीकी गलती के लिए कारावास की सजा नहीं मिलेगी। भजनलाल सरकार की ओर से राजस्थान जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश-2025 के संबंध में गजट नोटिफिकेशन जारी किया। इस अध्यादेश के माध्यम से 11 विभिन्न अधिनियमों में मामूली उल्लंघन या तकनीकी गलती के लिए कारावास जैसे आपराधिक दण्ड हटा कर उनके स्थान पर पेनल्टी का प्रावधान किया गया है। गत 3 दिसंबर को मंत्रिमण्डल की बैठक में उक्त अध्यादेश का अनुमोदन किया गया था।

इस अध्यादेश के द्वारा 11 अधिनियमों में से आपराधिक प्रावधान हटा दिए गए हैं। इनमें राजस्थान वन अधिनियम-1953, राजस्थान अभिधृति अधिनियम-1955, राजस्थान नौचालन विनियमन अधिनियम-1956, राजस्थान भाण्डागार अधिनियम-1958, राजस्थान राज्य सहायता (उद्योग) अधिनियम-1961, राजस्थान विद्युत (शुल्क) अधिनियम-1962, राजस्थान साहूकार अधिनियम-1963, राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम-1989, राजस्थान स्टाम्प अधिनियम-1998, राजस्थान नगरपालिका अधिनियम-2009, राजस्थान जल प्रदाय और मलवहन बोर्ड अधिनियम-2018 शामिल हैं।

आपको बता दें कि पहले राजस्थान वन अधिनियम-1953 में धारा 26 (1) (ए) में वन भूमि में मवेशी चराने पर अब तक 6 माह तक कारावास या 500 रुपए तक जुर्माने अथवा दोनों दण्ड का प्रावधान था। संशोधन के बाद अब इस उल्लंघन पर जुर्माना ही लगाया जाएगा, कारावास का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है।

राजस्थान राज्य सहायता (उद्योग) अधिनियम-1961 में सहायता प्राप्त करने वाले उद्योग के प्रभारी पर मामूली प्रक्रियात्मक अपराधों, जैसे बहीखाते, खाते या अन्य दस्तावेज निरीक्षण के लिए प्रस्तुत न करने पर कारावास का प्रावधान था। इन आपराधिक प्रावधानों को अब अधिनियम से हटा कर अर्थदण्ड तक सीमित किया गया है।

इसे कर दिया है अर्थदण्ड के प्रावधान तक सीमित

इसके साथ ही जयपुर वाटर सप्लाय एण्ड सीवरेज बोर्ड अधिनियम-2018 में जल की बर्बादी, दुरुपयोग, गैर-घरेलू कार्यों के लिए उपयोग, बोर्ड की सीवरेज लाइन में रुकावट डालने, बिना लिखित अनुमति सीवरलाइन से कनेक्शन जोड़ने आदि पर कारावास का प्रावधान था, जिसे हटाते हुए अर्थदण्ड के प्रावधान तक सीमित किया गया है।

PC:dipr.rajasthan
अपडेट खबरों के लिए हमारावॉट्सएप चैनलफोलो करें