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शुक्रवार, जुलाई 03, 2026

मुरादाबाद/उत्तर प्रदेश - गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय द्वारा घोषित एलएलबी प्रथम वर्ष के परिणाम पर फूटा छात्रो का आक्रोश, दी उग्र प्रदर्शन की चेतावनी

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एआई की सहायता से जेनेरेटेड इमेज 
गत शैक्षिक सत्र से मुरादाबाद मे स्थापित किया गया गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय लगातार विवादो से घिरा हुआ है। अब विश्विद्यालय द्वारा घोषित एलएलबी प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम को लेकर छात्रों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। परिणाम जारी होने के बाद छात्र-छात्राओं ने इसे त्रुटिपूर्ण बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से दोबारा जांच कराने और संशोधित परिणाम जारी करने की मांग की है।


छात्रों का कहना है कि इस परिणाम में असामान्य रूप से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को असफल घोषित किया गया है। कई छात्रों की सभी पांचों विषयों में बैक आने से परिणाम की पारदर्शिता और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रों का आरोप है कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गंभीर गड़बड़ी हुई है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।


जानकारी के अनुसार मुरादाबाद जिले के 42 संबद्ध कॉलेजों में एलएलबी प्रथम वर्ष के कुल 3,981 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। संवैधानिक विधि संविदा विधि, हिंदू विधि, भारतीय न्याय संहिता और अपकृत्य विधि जैसे प्रमुख विषयों में बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों को बैक पेपर मिलने से छात्रों में आक्रोश बढ़ गया है।


छात्र प्रतिनिधि सचिन चौधरी, अमित कुमार, मोहम्मद इमरान और अशीम शर्मा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे परिणाम की निष्पक्ष समीक्षा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो 6 जुलाई को केजीके कॉलेज परिसर में विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।


दूसरी ओर इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय के कुलपति सचिन माहेश्वरी ने कहा कि छात्रों की शिकायतों के आधार पर परिणाम की समीक्षा पहले ही कराई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि करीब दो महीने बाद संशोधित परिणाम जारी किया गया, जिसमें अधिक से अधिक विद्यार्थियों को राहत देने के उद्देश्य से ग्रेस अंक भी प्रदान किए गए हैं।


विश्वविद्यालय के इस स्पष्टीकरण के बावजूद छात्र संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि संशोधित परिणाम के बाद भी बड़ी संख्या में त्रुटियां बरकरार हैं, इसलिए उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कर निष्पक्ष और सही परिणाम घोषित किया जाना चाहिए। अब सभी की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम और छात्रों द्वारा घोषित 6 जुलाई के प्रस्तावित प्रदर्शन पर टिकी हैं।

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