
इंटरनेट डेस्क। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नोएडा की सड़कों हुए श्रमिकों को प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। वहीं पीएम मोदी पर भी तंज कसा है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस संबंध में एक्स के माध्यम से कहा कि कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आखिरी चीख थी - जिसकी हर आवाज को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया। नोएडा में काम करने वाले एक मजदूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह, ₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500 सालाना किराया बढ़ा देता है।
तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई जिंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज की गहराई में डुबा देती है - यही है “विकसित भारत”का सच। एक महिला मजदूर ने कहा - “गैस के दाम बढ़ते हैं, पर हमारी तनख्वाह नहीं।”इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए ₹5000 का भी सिलेंडर खरीदा होगा। यह सिर्फ नोएडा की बात नहीं है। और यह सिर्फ भारत की भी बात नहीं है। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं - पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है।
मगर, अमेरिका के टैरिफ वॉर, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन - इसका बोझ Modi जी के “मित्र”उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है उस मजदूर पर जो दिहाड़ी कमाता है, तभी रोज़ खाता है। वो मज़दूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई - जिसने बस काम किया। चुपचाप। बिना शिकायत और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है? दबाव और अत्याचार।
मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाजी में बिना संवाद लागू कर दिए
राहुल गांधी ने आगे लिखा कि एक और जरूरी मुद्दा - मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाजी में बिना संवाद नवंबर, 2025 से लागू कर, काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया। जो मजदूर हर रोज 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है फिर भी बच्चों की स्कूल फीस कर्ज लेकर भरता है - क्या उसकी मांग ग़ैरवाजिब है? और जो उसका हक हर रोज मार रहा है - वो “विकास” कर रहा है? नोएडा का मजदूर ₹20,000 माँग रहा है। यह कोई लालच नहीं - यह उसका अधिकार, उसकी जिंदगी का एकमात्र आधार है। मैं हर उस मजदूर के साथ हूं - जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है।
PC:dailypioneer
अपडेट खबरों के लिए हमारावॉट्सएप चैनलफोलो करें