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राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से मिली जमीन के मुआवजे की भारी-भरकम रकम को लेकर पति पत्नी के बीच हुआ एक विवाद सीधे 'तीन तलाक' और थाने तक पहुंच गया। शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव मुस्तफाबाद में हाईवे चौड़ीकरण के मुआवजे के विवाद को लेकर एक युवक ने अपनी पत्नी को बेरहमी से पीटने के बाद पंचायत और परिवार के सामने तीन तलाक दे दिया। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर पति, सास-ससुर और देवरों समेत पांच लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इशरत जहाँ निवासी ग्राम असारा, जिला बागपत का निकाह वर्ष 2012 में नईम निवासी ग्राम मुस्तफाबाद, थाना सहित नगर बिजनौर के साथ हुआ था। शादी के बाद सब कुछ ठीक चल रहा था। इसी बीच करीब एक साल पहले मेरठ-पौड़ी हाईवे (NH-34) के निर्माण में नईम के परिवार की जमीन आने पर उसे लगभग 20 लाख रूपये का मुआवजा मिला था। बताया गया कि मुआवजे की यह रकम नईम ने अपनी पत्नी इशरत जहां के बैंक खाते में जमा करा दी थी और कुछ सोने के जेवरात बनवाकर रख लिए थे। इशरत जहाँ के खाते मे 20 लाख रुपये खाते में आते ही पति और ससुरालियों की नीयत डोल गई। इसके बाद से ही पति और ससुराल के अन्य लोग इशरत पर वह रकम और जेवरात वापस सौंपने का दबाव बनाने लगे। इशरत द्वारा मना किये जाने पर उसे बेरहमी से पीटा जाने लगा।
इशरत जहां का आरोप है कि रविवार को इसी गृह क्लेश और रुपयों के लेन-देन को लेकर दोनों पक्षों में फिर से ठन गई। बात इतनी बढ़ी कि पति नईम, ससुर अब्दुल शमी, सास खुशनुदा और देवर नसीम व शाहजाद ने मिलकर इशरत को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। इस बीच सरेआम समाज और परिवार के सामने ही गुस्से में तमतमाए पति नईम ने कानून की परवाह किए बगैर पत्नी को 'तीन तलाक' दे दिया और घर से निकाल दिया।
घटना के तुरंत बाद देर शाम रोती-बिलखती पीड़िता अपने मायके वालों के साथ शहर कोतवाली पहुंची। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता की तहरीर पर पति नईम, सास खुशनुदा, ससुर अब्दुल शमी और देवर नसीम व शाहजाद के खिलाफ मुस्लिम महिला (विवाह अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम (तीन तलाक कानून), मारपीट और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है।

