विभिन्न राजनैतिक गतिविधियो को लेकर चर्चा मे बने रहने वाले उत्तर प्रदेश के रामपुर के जिला अस्पताल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। यहाँ कल शनिवार की देर रात अस्पताल पहुंचे एक बुजुर्ग मरीज को वार्ड तक पहुंचाने के लिए न तो वार्ड बॉय उपलब्ध मिला और न ही परिजनों को बेड या वार्ड की सही जानकारी दी गई। इसके चलते मरीज के तीमारदारों को खुद स्ट्रेचर संभालना पड़ा और करीब आधे घंटे तक अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकना पड़ा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कल शनिवार की देर रात कैमरी थाना क्षेत्र के गांव शिमलिया निवासी 65 वर्षीय सुखवासी की तबीयत खराब होने पर उन्हें सरकारी एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया था। परिजनों के मुताबिक अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज को एंबुलेंस से उतारकर वार्ड तक पहुंचाने के लिए कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। मरीज के परिजनों ने खुद ही उन्हें एंबुलेंस से उतारा और स्ट्रेचर पर लिटाकर अस्पताल के एमओटी व इमरजेंसी वार्ड की ओर ले गए। लेकिन भर्ती के लिए बेड और संबंधित वार्ड की जानकारी नहीं मिलने के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मरीज के तीमारदार भगवानदास ने आरोप लगाया कि अस्पताल में मदद के लिए कोई कर्मचारी उपलब्ध नहीं था। बेड की जानकारी लेने के लिए परिजन इधर-उधर पूछताछ करते रहे, लेकिन तत्काल सहायता नहीं मिल सकी। इस दौरान करीब आधे घंटे तक वे स्ट्रेचर पर मरीज को लेकर अस्पताल परिसर में घूमते रहे। एक अन्य तीमारदार ने बताया कि जब कोई कर्मचारी मदद के लिए नहीं आया तो मजबूरी में परिवार के लोगों को ही स्ट्रेचर खींचकर मरीज को इलाज के लिए ले जाना पड़ा।
जिला अस्पताल रामपुर में मरीजों और तीमारदारों को होने वाली परेशानी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अस्पताल परिसर से ऐसी तस्वीरें सामने आ चुकी हैं, जिनमें परिजन मरीजों को गोद, कंधे या अन्य साधनों के सहारे इलाज के लिए ले जाते दिखाई दिए। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर रात के समय वार्ड बॉय और अन्य सहायता कर्मियों की उपलब्धता को लेकर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आने वाली घटनाएं अलग तस्वीर पेश करती हैं। मरीज और उनके परिजन अस्पताल में इलाज के साथ-साथ स्ट्रेचर, बेड और वार्ड तक पहुंचने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशान होते नजर आ रहे हैं।
अब देखना होगा कि जिला अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और रात के समय मरीजों की सहायता के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा ऐसी अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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