आज गुरूवार को बैंकों के निजीकरण के खिलाफ यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के बैनर तले सभी बैंक कर्मी हड़ताल पर हैं। इसी क्रम ने मुरादाबाद में बैंक कर्मियों ने शहर में जुलूस निकालकर अपना विरोध जताया और मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इंडिनयन बैंक (इलाहाबाद) से शुरू हुई बैंक कर्मियों की रैली स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा पर पहुंचकर एक सभा में बदल गई। यहां बैंक कर्मियों ने निजीकरण के खिलाफ आरपार की लड़ाई का ऐलान किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने कहा है कि 2 दिन में सरकार उनकी मांगे नहीं मानती तो बैंक कर्मी अनिश्चतकालीन हड़ताल के लिए मजबूर होंगे।
धरने को संबोधित करते हुए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स मुरादाबाद के अध्यक्ष संजय रस्तोगी ने कहा- "हम सब बैंकों के निजीकरण के प्रयासों का पुरजोर विरोध करते हैं। इसी नीयत से बनाए गए बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक 2015 का भी सभी बैंक कर्मी विरोध करते हैं।" संजय रस्तोगी ने कहा- "सरकार की नीयत ठीक नहीं है। सरकार सरकारी बैंकों को धन्नासेठों के हाथों में बेचना चाहती है। जिससे धन्नासेठ जनता के और बैंकों के पैसे का मनमर्जी से अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर पाएंगे।"
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के मुरादाबाद यूनिट के अध्यक्ष संजय रस्तोगी ने कहा कि फिलहाल सभी बैंक कर्मी कामकाज छोड़कर 2 दिन की हड़ताल पर हैं। यदि इतने से भी सरकार नहीं चेती तो भी बैंक कर्मियों को बैंकों में ताले डालकर बेमियादी हड़ताल पर जाना होगा। बैंक कर्मियों ने कहा कि सरकार की बैंकों के निजीकरण की कोशिश आम जनता के हित में नहीं है। इससे जनता का पैसा सुरक्षित नहीं रह जाएगा। इसलिए जनता को भी सरकार की इन कोशिशों का विरोध करना चाहिए।
|
अभी तक पाठक संख्या |
