आज शनिवार को महर्षि दयानन्द सरस्वती की जयंती महापुरुष स्मारक समिति एवं सर्व समाज जागरूकता अभियान के संयुक्त तत्वावधान में कृष्णा नगर कालोनी में सुरेश चंद्र शर्मा के आवास पर धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने महर्षि दयानन्द के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कवि माधव मिश्रा ने महर्षि दयानन्द के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। माधव मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी दयानन्द जी का जन्म 12 फरवरी 1824 में टनकारा गुजरात में हुआ था। उनके पिता का नाम करशन लाल तिवारी और मां का नाम यशोदाबाई था। स्वामी दयानन्द सरस्वती आधुनिक भारत के महान चिंतक, समाज सुधारक और आर्य समाज के संस्थापक थे। वेदों की ओर वापसी उनका प्रमुख नारा था। आर्य समाज के नियम सिद्धांत प्राणिमात्र के कल्याण के लिए हैं, संसार का उपकार करना इस आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य है। महर्षि दयानन्द सरस्वती ने कहा था कि वेदों को छोड़कर कोई अन्य धर्मग्रंथ प्रमाणिक नहीं हैं। स्वामी दयानंद जी ने हिन्दू धर्म मे फैली बुराईयों व पाखण्डों का खंडन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एनके शर्मा ने की। इस अवसर पर उपस्थित रहे दिनेश चंद्र गुप्ता, सच्चिदानन्द शर्मा, नत्थू सिंह, भास्कर मिश्र, संजीव मिश्र, अमित कश्यप, गंगा देवी, विशेष शर्मा ने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर अजय शर्मा, रिंकू सिंह, धार्मिक दीक्षित, चन्द्रपाल सिंह, विक्रम सिंह, अक्षिता, वंश मिश्र, यश मिश्र आदि मौजूद रहे।
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