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उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी किये जाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में तैनात एक संविदा कर्मचारी पर विभाग में नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने का आरोप लगा है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कड़ी जांच के निर्देश दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बरेली के सुंदर नगर का निवासी राम गौरव सितम्बर 2025 मे अपने भाई का आयुष्मान कार्ड सही कराने सीएमओ कार्यालय पीलीभीत गया था। वहां उसकी मुलाकात कार्यालय के संविदा कर्मी अरुण कुमार मौर्य से हुई। आरोप है कि अरुण ने खुद को रसूखदार बताते हुए राम गौरव को स्वास्थ्य विभाग में 'कंप्यूटर ऑपरेटर' की सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया। अरुण ने राम गौरव से कहा कि इसके लिए कुछ पैसा देना होगा। राम गौरव जो फोटो स्टेट की छोटी से दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता है अरुण के झांसे के झांसे मे आ गए। सरकारी नौकरी पाने के लालच मे फंसे राम गौरव ने अरुण को देने के लिए 70 हजार का कर्जा ले लिया। राम गौरव ने 35 हजार की रकम सीधे अरुण के खाते मे ट्रांसफर कर दिए और 35 हजार रूपये यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर दिए।
राम गौरव का कहना है कि उसने ये रकम ब्याज पर कर्ज लेकर जुटाई थी। उसे उम्मीद थी कि सरकारी नौकरी लगने पर उसके दिन संवर जायेंगे। पैसा देने के महीनो बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर राम गौरव ने अरुण से पैसा वापस देने को कहा। इस पर अरुण ने उसके साथ गाली गलौज की और धमकी दी। ठगे जाने का अंदेशा होने पर अब पीड़ित राम गौरव ने जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह व पुलिस अधीक्षक/डीआईजी अभिषेक यादव को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित राम गौरव ने प्रार्थना पत्र के साथ ही पैसा देने के डिजिटल साक्ष्य व मोबाइल रिकॉर्डिंग भी अधिकारियो को सौंपी है।
पीड़ित ने अधिकारियो से सरकारी कार्यालय को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाने वाले इस कर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई किये जाने और दी गयी रकम वापस दिलाये जाने की मांग की है।

