उत्तर प्रदेश की पीलीभीत पुलिस ने बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर 2 लाख रुपये नकद, फर्जी जॉइनिंग लेटर, सेवा पुस्तिकाएं और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। गिरोह के तार गुजरात, कोलकाता और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से जुड़े हुए हैं।
आज सोमवार को मामले का खुलासा करते हुए अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम दहिया ने बताया कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम करता था। ठगी को असली रूप देने के लिए गिरोह का एक सदस्य फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर युवाओं से बात करता था। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने युवाओं को फर्जी नियुक्ति पत्र और आईडी कार्ड देने के बाद कुछ महीनों तक उनके खातों में 'सैलरी' भी भेजी। इसका मकसद युवाओं का विश्वास जीतना था ताकि वे अपने साथ अन्य साथियों को भी इस जाल में फंसा सकें।
इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब ग्राम भूड़ा निवासी राजकुमार ने अमरिया थाने में शिकायत दर्ज कराई। राजकुमार ने बताया कि नौकरी लगवाने के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली गई थी। थाना अमरिया पुलिस ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए मामले की जाँच शुरू कर दी थी। जाँच के दौरान पता लगा कि इस गिरोह के तार कई राज्यों में फैले हैं।
एएसपी ने बताया कि थाना अमरिया पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए इस शातिर गिरोह के 4 सदस्यो को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किये गए आरोपियो के नाम कमलेश कुमार, निवासी पीलीभीत, मोहम्मद मोहसिन, निवासी मोहल्ला भूरे खां, पीलीभीत, शोएब, निवासी पीलीभीत व रामा यादव, निवासी गोरखपुर है।
पुलिस ने आरोपी मोहसिन के घर से ठगे गए 2 लाख रुपए भी बरामद किये है। एसएसपी ने बताया कि गिरोह के 3 अन्य सदस्य शिव शंकर मिश्रा, निवासी गुजरात, पंकज जायसवाल, निवासी लखीमपुर और सरोज मौर्य, निवासी लखनऊ फिलहाल फरार हैं। ये लोग फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मुख्य सूत्रधार हैं। पुलिस की टीमें इन राज्यों में दबिश दे रही हैं। गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और उनके बैंक खातों व संपत्तियों की जांच कर ठगी की कुल रकम का आकलन किया जा रहा है।
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