जनपद मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र से आधुनिक समाज और प्रशासनिक दावो की पोल खोलता बंधुआ मजदूरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ लखनऊ निवासी एक व्यक्ति को कथित तौर पर 23 वर्षों तक बंधक बनाकर रखा गया और बिना वेतन के जबरन मजदूरी कराई गई। किसी तरह आरोपियों के चंगुल से भागकर निकले पीड़ित ने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद हड़कंप मच गया है।
लखनऊ के रहीमाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत गाँव रुसेना के निवासी पीड़ित शिवनाथ के अनुसार यह खौफनाक दास्तां दो दशक से भी ज्यादा पहले शुरू हुई थी। शिवनाथ के अनुसार करीब 23 साल पहले वह रोजगार की तलाश में मेरठ आया था, लेकिन रास्ता भटक गया। आरोप है कि इसी दौरान आरोपी राहुल चौधरी और उसके परिवार ने उसे पकड़ लिया और अपने घर में कैद कर लिया। तब से लेकर अब तक शिवनाथ की दुनिया उस चारदीवारी और खेतों तक ही सिमट कर रह गई थी। शिवनाथ ने पुलिस को बताया कि उससे खेतों में कड़ी मजदूरी और पशुओं की देखभाल का काम कराया जाता था। हैरानी की बात यह है कि दो दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उसे एक रुपया मजदूरी नहीं दी गई। शिवनाथ ने बताया कि इस सबका विरोध करने पर बेरहमी से मारपीट की जाती थी। आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी देकर इतना डरा दिया था कि वह भागने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था।
वर्षो के इंतजार के बाद शिवनाथ को 13 मार्च को भागने का अवसर मिला। उसने बताया कि एक अज्ञात व्यक्ति की मदद और अपनी हिम्मत के बल पर वह करीब 8 फीट ऊंची दीवार कूदकर भाग निकला। वहां से भागकर वह सीधे पुलिस के पास पहुंचा और अपनी आपबीती सुनाई। शिवनाथ के लिए यह आजादी किसी पुनर्जन्म से कम नहीं है। शिवनाथ ने पुलिस के सामने एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उसने बताया कि जिस जगह उसे रखा गया था, वहां एक और व्यक्ति को इसी तरह बंधक बनाकर जबरन मजदूरी कराई जा रही है। यदि इस दावे में सच्चाई है, तो यह एक बड़े संगठित अपराध की ओर इशारा करता है, जिसकी तत्काल जांच जरूरी है।
सियावा चौकी इंचार्ज सुभाष चंद ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। मामले के हर पहलू की गहराई से पड़ताल की जा रही है कि आखिर इतने लंबे समय तक यह मामला दबा कैसे रहा।
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