उक्त कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ विद्या भारती के प्रांत शैक्षिक प्रमुख महेश चंद्र शर्मा, विद्यालय के प्रबंधक राजीव कुमार अग्रवाल और प्रधानाचार्य सुरेंद्र कुमार शर्मा ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित व पुष्पार्चन कर किया। इसके पश्चात विद्यालय प्रांगण श्रद्धा और भक्ति के माहौल में सराबोर हो गया, जब बच्चों ने अपने माता-पिता के चरणों में झुककर उनका वंदन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ताओं ने कहा कि मातृ-पितृ पूजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ना है। वक्ताओं ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में पाश्चात्य सभ्यता (वेस्टर्न कल्चर) के अंधानुकरण के कारण युवा पीढ़ी अपने माता-पिता का सम्मान करना भूलती जा रही है इसके चलते बुजुर्गों को उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। विद्या भारती का प्रयास है कि बच्चों को बचपन से ही संस्कारी बनाया जाए ताकि वे जीवन भर अपने अभिभावकों का सम्मान करें और एक सार्थक जीवन जी सकें।
विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि विद्या भारती के निर्देशों पर समय-समय पर ऐसे आयोजन किए जाते हैं। इनका उद्देश्य केवल शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि बच्चों को नैतिक रूप से सुदृढ़ बनाना है। बच्चों से आह्वान किया गया कि वे आजीवन अपने माता-पिता की सेवा का संकल्प लें, क्योंकि माता-पिता का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
इस अवसर पर अफजलगढ़ विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य प्रकाशवीर, पूनम सिंह नेगी सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन चांदपुर विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य नवनीत चौधरी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में अभिभावकों ने भी विद्यालय की इस पहल की सराहना की और इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक कदम बताया।
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