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गुरुवार, अप्रैल 09, 2026

रामपुर/उत्तर प्रदेश - पुलिस को चकमा देकर हाईकोर्ट पहुँची पाकिस्तानी शिक्षिका, गिरफ्तारी पर लगी रोक, पढ़िए पूरा मामला ....

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अपनी पहचान छिपाकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका की नौकरी पाने वाली पाकिस्तानी नागरिक फरजाना उर्फ माहिरा अख्तर को पुलिस तीन महीने बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी है। रामपुर पुलिस महिला को तलाश करती रही और उसने हाईकोर्ट जाकर प्राथमिकी के खिलाफ याचिका दायर भी कर दी। फ़िलहाल हाईकोर्ट ने महिला की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

पाठको को बताना उचित होगा कि रामपुर के शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला आतिशबाज निवासी अख्तर अली की बेटी फरजाना ने 1979 में पाकिस्तानी नागरिक सिबगत अली से निकाह कर पाकिस्तान की नागरिकता ले ली थी। निकाह के 3 साल बाद ही तलाक होने पर वह अपनी दो बेटियों के साथ रामपुर लौट आई थी। वीजा खत्म होने के बाद भी भारत में रहने पर वर्ष 1983 में उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम की धारा 14 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। आरोप है कि इस दौरान फरजाना ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता को छिपाकर 22 जनवरी 1992 को प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली। वह सैदनगर ब्लॉक के कुम्हरिया स्कूल में तैनात थी।

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब स्थानीय खुफिया इकाई  ने उसे वीजा अवधि बढ़वाने का नोटिस दिया। जांच के दौरान पता चला कि वह सरकारी शिक्षिका के रूप में कार्यरत है। एलआईयू  की रिपोर्ट के बाद वर्ष 2021 में उसे नौकरी से बर्खास्त करते हुए शासन के निर्देश पर 6 जनवरी 2026 को थाना अजीमनगर मे धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही पुलिस महिला को तलाश करने मे जुटी थी।

इसी बीच हाईकोर्ट पहुंची महिला ने याचिका दाखिल कर दलील दी है कि उसे वर्ष 2021 में विभाग द्वारा बर्खास्त किया जा चुका है। इसके खिलाफ उसने पहले ही याचिका दायर की हुई है। महिला का कहना है कि जब मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन होने पर नई प्राथमिकी दर्ज करने का कोई औचित्य नहीं है। हाई कोर्ट ने फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल 2026 को तय की गई है।

इस मामले को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे है। महिला ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दलील दी है कि 6 जनवरी को मुकदमा दर्ज होने के बाद से पुलिस लगातार छापेमारी का दावा कर रही थी। लेकिन 3 महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अभी तक खाली रहे। इसी बीच महिला का हाई कोर्ट पहुँच जाना और गिरफ्तारी पर रोक लगवा लेना पुलिस की सक्रियता और खुफिया तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

उक्त मामले मे सरकार के अधिवक्ता का कहना है कि महिला ने पाकिस्तानी नागरिकता छिपाई और धोखाधड़ी कर सरकारी धन का लाभ लिया है। यह मामला काफी गंभीर है और हाई कोर्ट में प्रभावी पैरवी कर जवाब दाखिल किया जाएगा।
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