प्यार न सरहदें देखता है और न ही मजहब इस पुरानी कहावत को एक बार फिर चरितार्थ कर दिखाया है बिजनौर निवासी मुस्कान और बरेली निवासी कुनाल ने। मुस्लिम धर्म की मुस्कान ने अपने 4 साल पुराने प्रेम संबंध को मंजिल तक पहुँचाने के लिए सनातन धर्म अपनाकर अपने प्रेमी कुनाल से विवाह कर लिया। इस प्रेमी युगल का विवाह बरेली स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ यह विवाह संपन्न हुआ, जो अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बिजनौर निवासी मुस्कान ने बताया कि उसके मन मे कुनाल के प्रति प्रेम के साथ होने के साथ ही सनातन परंपराओं के लिए भी सम्मान था। वह राधा-कृष्ण की भक्ति से प्रभावित थीं। उन्होंने स्पष्ट किया, मेरा यह निर्णय केवल शादी के लिए नहीं है, बल्कि मेरी व्यक्तिगत आस्था भी इसमें शामिल है। मैंने बिना किसी दबाव के अपनी इच्छा से यह कदम उठाया है।
मुस्कान और कुनाल का यह सफर आसान नहीं था। अलग-अलग समुदाय से होने के कारण दोनो के परिवारों में भारी असहमति थी। सामाजिक दबाव और विरोध के बावजूद दोनों अपने फैसले पर अडिग रहे। इसी अडिग फैसले के चलते अगस्त्य मुनि आश्रम में विद्वानो की मौजूदगी में पहले मुस्कान का शुद्धिकरण किया गया, जिसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे का जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया।
यह विवाह जहाँ एक ओर प्रेम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मिसाल पेश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इसने समाज मे धर्म परिवर्तन और पारिवारिक भूमिकाओं पर एक नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय गलियारों तक इस अंतरधार्मिक विवाह को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
विवाह के बाद नवदंपति के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। मुस्कान ने अपनी नई पारी की शुरुआत पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि वह अब अपने पति के साथ विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन करना चाहती हैं। वहीं कुनाल ने भी मुस्कान के इस साहसी फैसले का सम्मान करते हुए उन्हें ताउम्र खुश रखने का वादा किया।
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