राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मचारियों का पिछले दो महीनों का मानदेय न मिलने के विरोध में शुरू हुआ प्रदेशव्यापी आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध 'उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ' के प्रांतीय अध्यक्ष ठा. मयंक प्रताप सिंह के आह्वान पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टांडा सहित क्षेत्र के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान स्वास्थ्य परिसरों में 'दाम नहीं तो काम नहीं' के नारे गूंजते रहे।
संघ के प्रदेश महामंत्री आदित्य भारती ने बताया कि विभाग की लापरवाही के कारण कर्मचारियों को मार्च और अप्रैल 2026 का मानदेय अब तक नहीं मिल सका है। मानदेय न मिलने से संविदा कर्मियों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि मई का महीना आधा बीत चुका है और बच्चों के स्कूलों का नया सत्र भी शुरू हो गया है। ऐसे में वे बच्चों की फीस, किताबें और घर के दैनिक राशन-पानी का इंतजाम करने में भी असमर्थ साबित हो रहे हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य कर्मियों में भारी रोष है।
मंगलवार को हुए इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में स्वास्थ्य विभाग का ढांचा संभालने वाले लगभग सभी संविदा कर्मी एकजुट नजर आए। आंदोलन में संविदा चिकित्सक, एएनएम स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, सीएचओ, पैरामेडिकल स्टाफ, बीपीएम, बीसीपीएम और मैनेजमेंट स्टाफ सहित सैकड़ों कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। संविदा कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य विभाग और शासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है। संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह विरोध प्रदर्शन 19 और 20 मई 2026 को भी इसी तरह जारी रहेगा। यदि 20 मई की शाम तक संविदा कर्मचारियों के रुके हुए मानदेय का भुगतान नहीं किया जाता है, तो 21 मई 2026 से प्रदेश भर के समस्त एनएचएम संविदा कर्मचारी पूर्ण कार्य बहिष्कार पर चले जाएंगे।
कर्मचारियों ने साफ किया है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते। इसलिए, यदि 21 मई से कार्य बहिष्कार की नौबत आती भी है, तो जनहित और मरीजों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं सुचारु रूप से चालू रखी जाएंगी। बहरहाल, अब सबकी नजरें प्रशासन के रुख पर टिकी हैं कि क्या 20 मई तक कर्मचारियों के खातों में उनकी गाढ़ी कमाई का पैसा पहुंच पाता है या नहीं।
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