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मंगलवार, जून 16, 2026

रामपुर/उत्तर प्रदेश - जिला जेल मे बंद कैदी की संदिग्ध परिस्तिथियो मे मौत, परिजनो ने लगाया मारपीट का आरोप

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उत्तर प्रदेश के रामपुर जिला जेल से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ जिला जेल में बंद 38  वर्षीय बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने जेल और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा किया है। परिजनों का दावा है कि फैसल की जेल में बेरहमी से मारपीट कर हत्या की गई है।


मृतक के भाई अर्शी ने बताया कि यह पूरा मामला 15 वर्ष पुराने एक मामूली विवाद से जुड़ा है। 15 वर्ष पूर्व फैसल ने गांव के ही एक लड़के को 5 हजार रुपये उधार दिए थे। पैसे वापस न करने पर दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ था, जिसके बाद विपक्षी दल ने केस दर्ज करा दिया था। इसी मामले में वारंट जारी होने के बाद 13 जून को टांडा पुलिस फैसल को उसके घर से उठाकर ले गई थी। 14 जून को कोर्ट में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। अर्शी के मुताबिक फैसल पेशे से मजदूर था और मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पेट पालता था।


घटना की सूचना मिलते ही फैसल की मां सरताज जिला अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने रोते हुए पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। मां का कहना है कि फैसल बिल्कुल ठीक था। उसे पुलिस वालों ने जेल में लात और घूसों से बेरहमी से मारा है। उसकी पूरी कमर पर चोट के निशान हैं और गला भी फटा हुआ है।


दूसरी तरफ जेल प्रशासन ने परिजनों द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। जेल अधीक्षक राजेश यादव ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि फैसल पुत्र साजिद, निवासी कस्बा टांडा को गत 14 जून को धारा 504 और 506 के एक मामले में जिला जेल लाया गया था। दाखिल होने के समय मेडिकल परीक्षण में उसके शरीर में अल्कोहल (शराब) की पुष्टि हुई थी। वह अत्यधिक नशा करने का आदी था। कल 15 जून को तबीयत खराब होने के कारण उसे जेल के ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा था। आज मंगलवार की  सुबह लगभग 6 बजे फैसल की हालत अचानक ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद जेल के डॉक्टरों ने उसे तुरंत जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।


जिला अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के मुताबिक फैसल को सुबह 6:55 बजे अस्पताल लाया गया था, लेकिन परीक्षण के दौरान वह मृत पाया गया। डॉक्टरों ने उसे 'ब्रॉट डेड' (अस्पताल लाने से पहले ही मृत) घोषित कर दिया। ईएमओ ने स्पष्ट किया कि मौत के वास्तविक और सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।


जेल में बंदी की मौत और परिजनों के हंगामे की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। सदर तहसील के नायब तहसीलदार, थाना गंज पुलिस और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को समझा-बुझाकर शांत कराया और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।


फिलहाल शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर जेलों में बंदियों की सुरक्षा और कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के सवालों को गरमा दिया है।

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