समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ध्वस्त किए जाने के आदेश के विरोध में छात्र-छात्राओं का अनिश्चितकालीन धरना रविवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। लगातार हो रही बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर डटे रहे और अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते रहे।
धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि भवनों को ध्वस्त करने का आदेश हजारों विद्यार्थियों के भविष्य पर सीधा असर डाल सकता है। उनका कहना है कि जब तक जिला प्रशासन इस आदेश को वापस नहीं लेता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रशासन से न्याय की मांग की और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने बताया कि उनकी तीन प्रमुख मांगों में से एक मांग पूरी कर दी गई है। विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने लगाया गया काउंसलिंग कैंप हटा दिया गया है। हालांकि, दो महत्वपूर्ण मांगें अब भी लंबित हैं। पहली, 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश निरस्त किया जाए और दूसरी, विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ किसी भी प्रकार का उत्पीड़न न किया जाए।
यह आंदोलन शनिवार दोपहर को शुरू हुआ था। पहले दिन दिन भर धरना देने के बाद रात में प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया था, जबकि रविवार सुबह छात्र दोबारा विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर एकत्र होकर धरने पर बैठ गए। बारिश के बावजूद करीब 100 छात्र-छात्राएं प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते रहे।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन की ओर से धरने को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। छात्र प्रशासन से सकारात्मक पहल की उम्मीद लगाए हुए हैं। वहीं पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है कि प्रशासन इस विरोध प्रदर्शन और छात्रों की मांगों पर आगे क्या निर्णय लेता है।
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