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सोमवार, जुलाई 20, 2026

पीलीभीत/उत्तर प्रदेश - उपचार न मिलने पर 9 घंटे तक तड़पती रही मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुई प्रसूता, नवजात की मौत पर आक्रोशित परिजनो ने किया हंगामा

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पीलीभीत के राजकीय मेडिकल कॉलेज से कथित चिकित्सीय लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ  प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला को समय पर उपचार न मिलने का आरोप लगाते हुए परिजनों ने नवजात की मौत के बाद अस्पताल परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यूरिया थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरिया आगरू निवासी अजय कुमार की पत्नी उर्मिला देवी आयु 28 वर्ष को रविवार की देर रात लगभग 12 बजे प्रसव हेतु राजकीय मेडिकल कॉलेज मे भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि उस समय महिला को तेज प्रसव पीड़ा के साथ अत्यधिक रक्तस्राव भी हो रहा था। आरोप है कि अस्पताल में भर्ती किए जाने के बावजूद महिला का तत्काल उपचार शुरू नहीं किया गया। अस्पताल स्टाफ लगातार "बड़े डॉक्टर के आने" का हवाला देता रहा, जिसके कारण प्रसूता को पूरी रात इलाज का इंतजार करना पड़ा। आरोप है कि करीब नौ घंटे तक न तो आवश्यक चिकित्सा सहायता दी गई और न ही समय पर प्रसव कराया गया।


परिजनों के मुताबिक आज सोमवार सुबह लगभग 9 बजे प्रसव कराया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। प्रसव के दौरान जन्मे नवजात शिशु की मौत हो गई। महिला की सास चमेली देवी ने बताया कि उनकी बहू पूरी रात दर्द से तड़पती रही, लेकिन किसी ने इसको गंभीरता से नही लिया। महिला के पति अजय कुमार का आरोप है कि समय रहते इलाज मिलने पर उनके बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।


नवजात की मौत से आक्रोशित परिजनों ने मेडिकल कॉलेज परिसर में हंगामा शुरू कर दिया और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सूचना मिलते ही शहर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को शांत कराते हुए पूरे मामले की जानकारी जुटाई। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है।


राजकीय मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. राजेश ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


फिलहाल परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की बात कही है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या चिकित्सा प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी।

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