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मंगलवार, अगस्त 18, 2026

मुरादाबाद/उत्तर प्रदेश - तेंदुए के हमले मे हुई महिला की मौत पर फूटा ग्रामीणों का आक्रोश, पुलिस व वन विभाग की टीम पर किया पथराव

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वन विभाग द्वारा किए जा रहे तमाम प्रयासो के बाद भी जिला मुरादाबाद व आसपास के क्षेत्र मे गुलदार व तेंदुए का आतंक बना हुआ है। इन वन्य जीवो द्वारा किये गए हमले को लोग भूला भी नही पाते उससे पहले ही एक नई घटना सामने आ जाती है। अभी 15 दिन पूर्व ही लालापुर पीपलसाना गाँव मे हुए तेंदुए के हमले को लोग भुला भी नही सके थे कि आज मंगलवार को तेंदुए फिर से एक बुजुर्ग महिला पर हमला कर उसकी जान ले ली। ठाकुरद्वारा कोतवाली क्षेत्र के गाँव बलिया मे हुई इस घटना पर आक्रोशित ग्रामीणो ने मौके पर पहुंची पुलिस व विभाग की टीम पर पथराव कर दिया। दूसरी ओर इस घटना मे हुई महिला की मौत के बाद परिजनो मे कोहराम मचा हुआ है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार ठाकुरद्वारा थाना क्षेत्र के ग्राम बलिया की निवासी विरमो देवी आयु 60 वर्ष पत्नी बलराम सिंह सैनी आज मंगलवार को पशुओ के लिए चारा लाने जंगल गयी थी। वह खेत मे अन्य महिलाओ के साथ चारा काटने मे व्यस्त थी। इसी दौरान गन्ने के खेत से निकले ने अचानक ही उस पर हमला कर दिया। तेंदुए ने विरमो  देवी की गर्दन दबोच ली और खेत मे ले जाने का प्रयास किया। विरमो देवी की चीख पुकार सुन चारा काट रही अन्य महिलाये व खेतो मे काम कर रहे किसान लाठी डंडे लेकर शोर मचाते हुए मौके पर पहुंचे। ग्रामीणो का शोर सुन तेंदुए ने विरमो देवी को छोड़ दिया और गन्ने के खेत मे भाग गया, मगर तब तक महिला की मौत हो चुकी थी।


विरमो देवी की मौत की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश दिखाई दिया। उनका आरोप है कि क्षेत्र में लगातार तेंदुए की मौजूदगी और हमलों के बावजूद वन विभाग की ओर से उसे पकड़ने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। घटना की सूचना पर वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन गुस्साए ग्रामीणों ने टीम का विरोध शुरू कर दिया। इसी दौरान पथराव होने से मौके पर तनाव की स्थिति पैदा हो गई। अधिकारियों ने स्थिति संभालने का प्रयास किया।


बलिया की घटना ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तेंदुए की दहशत को और बढ़ा दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 15 दिन पहले लालापुर पीपलसाना गांव में भी तेंदुए के हमले में संतोष देवी की मौत हो गई थी। अब दूसरी महिला की जान जाने के बाद ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में काम करने वाले किसान, महिलाएं और बच्चे तेंदुए के डर के साये में हैं। गन्ने और घनी फसलों वाले इलाकों में तेंदुए के छिपे होने की आशंका के चलते खेतों में जाना भी जोखिम भरा हो गया है।


ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को जल्द पकड़ने के लिए तत्काल प्रभावी अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार हो रहे हमलों के बाद केवल निगरानी और आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं। खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने के साथ तेंदुए की तलाश कर उसे पकड़ना जरूरी है।


बलिया की घटना ने एक बार फिर वन्यजीव और इंसानी आबादी के बीच बढ़ते टकराव की गंभीर तस्वीर सामने रख दी है। अब निगाहें वन विभाग की कार्रवाई पर हैं कि इलाके में दहशत का कारण बने तेंदुए को कब तक पकड़ा जाता है और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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