उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ से प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी से मकान की रजिस्ट्री और कब्जा दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। आवास एवं विकास परिषद के कार्यालय में तैनात आउटसोर्स कर्मचारी को एंटी करप्शन मेरठ की टीम ने छह हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई के बाद कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
एंटी करप्शन टीम के मुताबिक किनानगर निवासी रंजना को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान आवंटित हुआ था। पति की मृत्यु के बाद वह अपने चार बच्चों के साथ जीवन यापन कर रही हैं। मकान आवंटित होने के बाद इसकी रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करानी थी। आरोप है कि आवास एवं विकास परिषद के शास्त्री नगर स्थित कार्यालय में रंजना की फाइल पहुंचने के बाद आउटसोर्स कर्मचारी अभिनव शर्मा ने रजिस्ट्री और पजेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के एवज में उससे छह हजार रुपये की मांग की थी। कर्मचारी द्वारा लगातार रकम देने का दबाव बनाए जाने से परेशान होकर रंजना ने मामले की शिकायत एंटी करप्शन टीम से कर दी।
शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन अधिकारियों ने आरोपों का सत्यापन कराया और पुष्टि होने के बाद आरोपी को पकड़ने के लिए योजना तैयार की गई। योजना के तहत एंटी करप्शन टीम ने आज मंगलवार को रंजना को केमिकल लगे नोट देकर आवास विकास परिषद कार्यालय भेजा। निर्धारित योजना के मुताबिक रंजना ने कर्मचारी अभिनव शर्मा को छह हजार रुपये दे दिए। रकम लेते ही आसपास मौजूद एंटी करप्शन टीम ने आरोपी को पकड़ लिया। टीम ने आरोपी के कब्जे से रिश्वत की रकम बरामद कर उसे हिरासत में ले लिया। कार्रवाई की जानकारी मिलते ही कार्यालय के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
रंजना के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें करीब 6.75 लाख रुपये का मकान आवंटित हुआ है। आवंटन के बाद उन्हें 76 हजार रुपये डाउन पेमेंट के रूप में जमा करने थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने दो प्रतिशत ब्याज पर रकम लेकर डाउन पेमेंट जमा किया था। इसके अलावा 3230 रुपये की तीन किस्तें भी जमा की जा चुकी हैं। रंजना ने बताया कि मकान आवंटित होने के बाद वह आवास एवं विकास परिषद के शास्त्री नगर कार्यालय में अपनी फाइल को लेकर संपर्क कर रही थीं। शुरुआत में फाइल अरुण नाम के कर्मचारी के पास बताई गई, लेकिन बाद में यह अभिनव शर्मा के पास पहुंच गई।
आरोप है कि फाइल अभिनव के पास पहुंचने के बाद रजिस्ट्री और पजेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए 6200 रुपये खर्चे के नाम पर मांगे गए। रंजना का कहना है कि रकम देने के लिए उस पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। रिश्वत की मांग से परेशान होकर रंजना ने एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया। इस कार्रवाई के लिए रंजना को छह हजार रुपये देने थे। बताया गया कि रकम की व्यवस्था करने के लिए रंजना ने अपनी कानों की बाली तक गिरवी रख दी।
इसके बाद एंटी करप्शन टीम द्वारा दिए गए केमिकल लगे नोट लेकर वह आवास एवं विकास परिषद कार्यालय पहुंचीं। जैसे ही उन्होंने अभिनव शर्मा को छह हजार रुपये दिए, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया।
आरोपी के गिरफ्तार होने के बाद एंटी करप्शन टीम अब उससे पूछताछ कर रही है। जांच का एक प्रमुख बिंदु यह है कि क्या रिश्वत की मांग केवल आउटसोर्स कर्मचारी ने अपने स्तर पर की थी या इस मामले में किसी अन्य कर्मचारी अथवा अधिकारी की भी भूमिका थी। टीम यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्य लाभार्थियों से रजिस्ट्री, पजेशन अथवा दूसरी सरकारी प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर अवैध रकम तो नहीं मांगी गई।
रंजना के पति देवेंद्र निजी नौकरी करते थे। कोरोना काल के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। पति के निधन के बाद रंजना अपने चार बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं और वर्तमान में जेठ-जेठानी के साथ रह रही हैं। पिछले वर्ष उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान के लिए आवेदन किया था। फरवरी में उन्हें मकान आवंटित हुआ। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने डाउन पेमेंट और निर्धारित किस्तों की रकम जुटाकर जमा की। अब मकान की रजिस्ट्री और पजेशन की प्रक्रिया पूरी कराने के दौरान रिश्वत मांगने का आरोप सामने आया।
एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई के बाद अब पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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