जिला मेरठ के परीक्षितगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मानवता को शर्मसार करने वाला भ्रष्टाचार का एक मामला सामने आया है। यहाँ टीबी जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजो के लिए आने वाली सरकारी सहायता राशि को एक अधिकारी ने धोखाधड़ी कर अपने रिश्तेदारों के नाम पर डकार लिया। पुलिस ने इस मामले मे प्राप्त शिकायत के आधार पर सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पाठको को बताना उचित होगा कि राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी के मरीजों को पोषण के लिए प्रतिमाह 500 रुपये की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में दी जाती है। आरोप है कि परीक्षितगढ़ सीएचसी में एसटीएस के पद पर तैनात किठौर निवासी जुनैद जब्बार ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने सगे-संबंधियों और परिजनों को टीबी का मरीज दिखाकर सरकारी धन हड़प लिया है।
उक्त मामले को लेकर मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 अशोक कटारिया के निर्देश पर हुई जाँच मे चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए। जाँच मे पता लगा कि 20 जनवरी 2024 को कुछ खातों में सरकारी सहायता राशि भेजी गई थी। पता लगा कि इन खातो से ये रकम उसी दिन आरोपी जुनैद के व्यक्तिगत खाते में ट्रांसफर कर दी गई। फिलहाल विभाग लगभग 40 ऐसे संदिग्ध बैंक खातों की जांच कर रहा है, जिनका इस्तेमाल इस फर्जीवाड़े के लिए किया गया। इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब आरोपी के रिश्तेदार शाकिब अहमद ने जिलाधिकारी से लिखित शिकायत की।
मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही आरोपी जुनैद पिछले 6 दिनों से ड्यूटी से गायब है। वहीं, शिकायतकर्ता शाकिब ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उस पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है और जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। शाकिब ने डीआईजी और एसएसपी से सुरक्षा की गुहार लगाई है।
सीओ सदर देहात शिव प्रताप सिंह ने बताया कि सीएचसी प्रभारी की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। परीक्षितगढ़ पुलिस को आरोपी की जल्द गिरफ्तारी और साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।
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