विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा हाल ही में जारी किये गए समता कानून को लेकर सवर्ण समाज का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस कानून के विरोध मे आज बुधवार को बिल्सी की सड़कों पर उतरे सवर्ण समाज के लोगो ने जोरदार प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियो ने गांधी पार्क से तहसील परिसर तक पैदल मार्च निकाला और केंद्र सरकार व यूजीसी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस विरोध की गूंज देश व प्रदेश की सत्ता पर आसीन भाजपा के भीतर भी सुनाई दी। इस कानून के विरोध में तीन बूथ अध्यक्षों ने अपने पदों से इस्तीफा देकर सियासी हलचल मचा दी है।
आज बुधवार को सवर्ण समाज के लोग हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर नगर के गांधी पार्क में एकत्रित हुए। इन लोगो ने यहॉ से तहसील परिसर तक पैदल मार्च निकाला और 'यूजीसी कानून वापस लो' 'समाज को बांटने की साजिश नहीं चलेगी' के नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया। तहसील परिसर पहुँचे प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन भी उपजिलाधिकारी प्रेमपाल सिंह को सौंपा।
इस दौरान भाजपा नेता शैलेंद्र शर्मा ने कहा कि यूजीसी के नए नियम समाज में भ्रम और विभाजन पैदा कर रहे हैं, जिसे सवर्ण समाज किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। व्यापारी नेता डा0 राजाबाबू वार्ष्णेय ने कहा कि विद्यार्थियों को आपस में बांटने का यह प्रयास देशहित में नहीं है। वही समाजसेवी दीपक चौहान और रजनीश शर्मा ने चेतावनी दी कि इन कानूनो के वापस न होने पर आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
इतना ही नही यूजीसी कानूनो के विरोध की आग अब राजनीति तक पहुंच गई है। कानून को 'सवर्ण विरोधी' और 'काला कानून' बताते हुए उघैती मंडल के दो भाजपा बूथ अध्यक्षों सुमित गुप्ता और केशव मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसी क्रम में बिसौली विधानसभा के भाजपा बूथ अध्यक्ष सोमेश मिश्रा ने भी मंडल अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने अपने त्याग पत्र में स्पष्ट लिखा कि वह यूजीसी के नियमों को सामाजिक सिद्धांतों के प्रतिकूल मानते हैं और स्वप्रेरणा से पद छोड़ रहे हैं। एक साथ तीन पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद जिले की सियासत में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इस प्रदर्शन के दौरान तहसील परिसर और आसपास के क्षेत्र मे भारी पुलिस बल तैनात रहा। सवर्ण समाज के नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक नए नियम वापस नहीं होंगे, संघर्ष की यह मशाल जलती रहेगी।
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