
जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर से विकास कार्यों को लेकर प्रदेश की भजनलाल सरकार पर निशाना साधा है। इस संबंध में उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ी बात कही है।
गहलोत ने एक्स के माध्यम से कहा कि ये खबरें बता रही हैं कि भाजपा सरकार की बजट घोषणाएं केवल सपने साबित हो रही हैं। बीकानेर से लेकर बांसवाड़ा तक, पूरे प्रदेश में विकास कार्य सिर्फ कागज़ों में धूल खा रहे हैं। हैरत की बात है कि 2-2 साल बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं और एक्सप्रेसवे जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की DPR तक तैयार नहीं हुई। वहीं दूसरी ओर, प्रदेश के 40 लाख मासूम बच्चे अपनी यूनिफॉर्म के मात्र ₹600 के लिए दर-दर भटक रहे हैं। सत्र खत्म होने को आ गया है, पर बालिकाओं को साइकिलें नहीं मिली हैं। क्या यही भाजपा का 'सुशासन' है?
ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री विधानसभा में जो "जीरो राग" अलाप रहे थे, वही आपके शासन की सच्चाई बन गया है। मुख्यमंत्री का काम केवल बार-बार दिल्ली दरबार में हाज़िरी देकर अपनी कुर्सी बचाना रह गया है और विकास व सुशासन से उनका कोई वास्ता ही नहीं है।
वहीं गहलोत ने एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि एसएमएस अस्पताल में निजी ब्लड बैंकों से ब्लड नहीं ला पाने के नियम के कारण मरीजों को समय पर रक्त नहीं मिल पाने, अधिक यूनिट की जरूरत पर ऑपरेशन प्रभावित होने, दुर्लभ ब्लड ग्रुप के मामलों में भारी परेशानी और दलालों की सक्रियता जैसी खबरें बेहद चिंताजनक हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि विधानसभा में सरकार ने उत्तर दिया कि निजी ब्लड बैंकों से जुड़े रक्त के रख-रखाव में अनियमितताओं या अवैध बिक्री की शिकायतें प्राप्त नहीं हुईं। यदि शिकायतें नहीं हैं, तो फिर रोक क्यों लगाई गई है?
बाहरी लाइसेंसी स्रोतों से आपातकालीन रक्त उपलब्ध कराने की स्पष्ट प्रणाली बनानी चाहिए
जीवनरक्षक उपचार में ऐसी अव्यवस्था अस्वीकार्य है। राज्य सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर एसएमएस में रक्त उपलब्धता की पारदर्शी, मानवीय और प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, बाहरी लाइसेंसी स्रोतों से आपातकालीन रक्त उपलब्ध कराने की स्पष्ट प्रणाली बनानी चाहिए और बिचौलियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
PC:rajasthan.ndtv
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