पीतल नगरी मुरादाबाद के सियासी गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मुरादाबाद नगर निगम मे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सड़क पर आ गए हैं। भाजपा के महापौर (मेयर) विनोद अग्रवाल के खिलाफ उनकी ही पार्टी के 16 पार्षदों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। पार्षदों ने मेयर पर अभद्रता, तानाशाही और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को एक शिकायती पत्र भेजा है।
प्रदेश अध्यक्ष को शिकायती पत्र भेजने से पहले आक्रोशित भाजपा पार्षदों ने कपूर कंपनी पर इकट्ठा होकर मेयर विनोद अग्रवाल के खिलाफ जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी पार्षदों का कहना है कि मेयर का व्यवहार पार्टी के ही जनप्रतिनिधियों के प्रति लगातार अपमानजनक होता जा रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को भेजी गई सामूहिक चिट्ठी में पार्षदों ने बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं में शामिल महिला पार्षदों का कहना है कि मेयर विनोद अग्रवाल महिला पार्षदों की गरिमा का भी ख्याल नहीं रखते। शिकायती पत्र मे बताया गया है कि महापौर महिला पार्षदों की उपस्थिति में भी ऐसी असंसदीय और अनुचित भाषा का प्रयोग करते हैं, जिसे सुनकर शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। इसी वजह से कई महिला पार्षद अब नगर निगम कार्यालय आने में भी संकोच महसूस करने लगी हैं।
इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर और चौंकाने वाला आरोप भाजपा के ही एक दलित पार्षद प्रशांत कुमार ने लगाया है। पार्षद प्रशांत कुमार के अनुसार गत 12 जून को नगर निगम की कार्यकारिणी की एक बैठक बुलाई गयी थी। कुछ निजी और अपरिहार्य कारणों से वे इस बैठक मे शामिल नहीं हो पाए थे। आरोप है कि इसके बाद 14 जून को बुलाई गयीबैठक में मेयर ने अन्य पार्षदों (राहुल देव, वरुण, तुषार सिंह, विशाल सिंह गोलू) और भाजपा मंडल अध्यक्ष गजेंद्र लोधी की मौजूदगी में उनका सरेआम अपमान किया। प्रशांत कुमार का आरोप है कि मेयर विनोद अग्रवाल ने उन्हें बेहद अमर्यादित लहजे में धमकी देते हुए कहा कि तेरे वार्ड में रेलवे लाइन है, वहीं पड़ा मिलेगा। पार्षदों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है; मेयर इससे पहले भी कई बार भाजपा पार्षदों को बुरी तरह अपमानित कर चुके हैं।
महापौर विनोद अग्रवाल ने उक्त सभी आरोपों को सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा कि यह मामला पूरी तरह से संगठन के स्तर पर निपटा लिया गया है। अब कोई विवाद या शिकायत बाकी नहीं रह गई है। जहां तक विरोध की बात है मैं हर गलत काम या नाजायज चीज में सहभागी नहीं बन सकता, शायद इसी वजह से कुछ लोग मेरा विरोध कर रहे हैं।
भले ही मेयर मामले के शांत होने का दावा कर रहे हों, लेकिन अपनी ही पार्टी के 16 पार्षदों का इस तरह सड़क पर उतरकर विरोध करना और सीधे प्रदेश नेतृत्व को चिट्ठी भेजना यह साफ करता है कि मुरादाबाद भाजपा में अंदरूनी कलह बेहद गहरे स्तर पर पहुंच चुकी है। अब देखना यह होगा कि लखनऊ में बैठा भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अपने इस अंतर्विरोध को कैसे संभालता है।
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