आज बुधवार को जिले भर से बिजनौर पहुंचे सैकड़ो किसानो ने राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले एकत्र होकर कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। दोपहर करीब 12 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानो ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा और मांगों के समाधान की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रहे बदलावों पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि बार-बार पाठ्यक्रम बदलने से विद्यार्थियों और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। किसानों ने कम से कम पांच वर्षो तक पाठ्यक्रम में कोई परिवर्तन न किये जाने के साथ ही निजी विद्यालयों और प्रकाशकों की मिलीभगत से महंगी किताबों की बिक्री पर रोक लगाने की भी मांग की गई। किसानों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी अस्पतालों, पैथोलॉजी लैब और दवा कंपनियों के बीच चल रही कमीशन आधारित व्यवस्था के कारण मरीजों को अनावश्यक जांच और महंगी दवाइयां लिखी जा रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। किसानो ने आयुष्मान भारत योजना के तहत बनने वाले कार्डों के कथित दुरुपयोग पर भी चिंता जताई गई।
इस धरना प्रदर्शन में भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी प्रमुखता से छाया रहा। किसानों ने कहा कि जिले में प्रस्तावित दो राष्ट्रीय राजमार्ग और एक कॉरिडोर परियोजना के लिए उनकी हजारों बीघा कृषि भूमि अधिग्रहित की जानी है, मगर इसके बदले दिया जाने वाला प्रशासन द्वारा निर्धारित सर्किल रेट बाजार मूल्य की तुलना में बेहद कम है। किसानों ने उचित मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए सर्किल रेट में संशोधन की मांग की। बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी किसानों ने नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि बिना कोई पूर्व सूचना दिए उपभोक्ताओं का बिजली भार बढ़ाया जा रहा है तथा बिजली बिलों में अनियमितताएं सामने आ रही है। इस सबके चलते ग्रामीण उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बिलों की निष्पक्ष जांच और विभागीय मनमानी पर रोक लगाने की मांग की।
गन्ना किसानों ने बिलाई शुगर मिल द्वारा पिछले पेराई सत्र का भुगतान लंबित होने का मुद्दा भी उठाया। किसानों का कहना था कि भुगतान में देरी के कारण खेती-किसानी प्रभावित हो रही है और आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने बकाया राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने दूध और उससे बने उत्पादों में बढ़ती मिलावट पर चिंता व्यक्त करते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि मिलावटी खाद्य पदार्थ लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।
प्रदर्शन के अंत में किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप देगा। प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर किसानों को उनकी मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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