
मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी भाजपा शासित राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों के एक सम्मेलन में भी भाग लेंगे। इस सम्मेलन में बिहार और नगालैंड के उपमुख्यमंत्री भी भाग लेंगे।
यह सम्मेलन शासन संचालन (गर्वनेंस) से संबंधित सर्वोत्तम प्रथाओं या तौर-तरीकों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा। इतना ही नहीं, यह टीम इंडिया की भावना को आगे बढ़ाने के प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप है।
इसके बाद वह साढे तीन बजे वाराणसी स्थित स्वर्वेद महामंदिर में सद्गुरु सदाफलदेव विहंगम योग संस्थान के 98वें वार्षिकोत्सव में शामिल होंगे।
उल्लेखनीय है कि काशी विश्वनाथ मंदिर को गंगा नदी के तट से जोड़ने के लिए एक सुगम मार्ग के सृजन की परियोजना के रूप में श्री काशी विश्वनाथ धाम की परिकल्पना की गई है। इस पुनीत कार्य को शुरू करने के लिए, 8 मार्च, 20 19 को प्रधानमंत्री द्बारा परियोजना की आधारशिला रखी गई थी।
परियोजना के पहले चरण में निर्मित काशी विश्वनाथ धाम परिसर में निर्मित कुल 23 भवनों का आज प्रधानमंत्री द्बारा उद्घाटन किया जाएगा। ये भवन काशी विश्वनाथ मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों को कई तरह की सुविधाएं प्रदान करेंगे। इनमें यात्री सुविधा केंद्र, पर्यटक सुविधा केंद्र, वैदिक केंद्र, मुमुक्षु भवन, भोगशाला, सिटी म्यूजियम, दर्शक दीर्घा, फूड कोर्ट आदि शामिल हैं।
इस परियोजना की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह परियोजना अब लगभग 5 लाख वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में फैली हुई है। जबकि अभी तक मंदिर परिसर तकरीबन 3000 वर्ग फुट तक ही सीमित था। कोविड महामारी के बावजूद इस परियोजना का निर्माण कार्य निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही पूरा कर लिया गया है।
परियोजना को रैंप, एस्केलेटर और अन्य आधुनिक सुविधाओं के साथ डिज़ाइन किया गया, ताकि दिव्यांगजनों और वृद्ध लोगों को पहुंचने में आसानी हो। प्रधानमंत्री के ष्टिकोण के तहत यह भी सुनिश्चित किया जाना था कि परियोजना के विकास के दौरान सभी विरासत संरचनाओं को संरक्षित किया जाए। यह दूरदर्शिता तब काम आई, जब पुरानी संपत्तियों को नष्ट करने की प्रक्रिया के दौरान 40 से अधिक प्राचीन मंदिरों को फिर से खोज निकाला गया। इन मंदिरों का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया गया है और इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि मूल संरचना में कोई बदलाव न हो।