खाकी वर्दी का रौब क्या होता है इसका जीता जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश की सम्भल कोतवाली में भी उस समय देखने को मिला जब कोतवाली में तैनात एक महिला दारोगा ने एक फरियादी से अपने पैर दबवाए। कुछ लोगों की नजर इस ओर गयी तो दारोगा जी कहने लगीं कि गर्दन में दर्द था इसलिए एक्यूप्रेशर विधि से उपचार करा रही थी। उत्तर प्रदेश पुलिस की महिला दारोगा की यह हरकत सुर्खियों छाई हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कोतवाली सम्भल में तैनात महिला दारोगा शबनम कुर्सी पर बैठी हुईं थीं। इसी दौरान एक फरियादी जो उत्तराखंड के हल्द्वानी का निवासी बताया गया वहाँ पहुँचा। महिला दारोगा काफी देर से कुर्सी पर बैठी थी इस कारण उनके पैरों में दर्द होने लगा। महिला दारोगा को पैर दबाने वाला कोई व्यक्ति चाहिए था। इसी दौरान वहाँ एक शिकायकर्ता पहुंच गया। महिला दारोगा ने उससे कहा कि आपकी शिकायत तो जरूर सुनी जाएगी, लेकिन मेरे पैरों में दर्द है पहले मेरे पैर दबा दो। फरियादी को अपनी शिकायत का समाधान कराना था तो वह दारोगा के सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ गया। इसके बाद महिला दारोगा शबनम ने शिकायकर्ता को अपने पैर पकड़ा दिए और फरियादी ने दारोगा के पैर दबाने शुरू कर दिए। जब इस तरफ कुछ लोगों की नजर पड़ी तो महिला दारोगा ने सफाई देते हुए कहा कि मेरी गर्दन में दर्द हो रहा था इसलिए एक्यूप्रेशर विधि से उपचार करा रही थी। वहीं मामले को लेकर शहरभर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है, कुछ इसे दारोगा की मनमानी बता रहे हैं तो कुछ इस रवैये पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
दूसरी ओर इस मामले में कोतवाल संभल पंकज लावनिया का कहना है कि ये मामला उनके संज्ञान में नहीं है। पुलिस अधीक्षक संभल चक्रेश मिश्र का कहना है कि महिला दारोगा को कुछ समस्या है ऐसी जानकारी मिली है मगर कार्यालय में बैठकर उपचार कराना सही नहीं है। इस सम्बन्ध में जानकारी की जा रही है।