सरकार द्वारा भ्रष्टाचार मुक्त भारत व पारदर्शी तकनीकों से सरकारी योजनाओ का लाभ पात्रो तक पहुँचाने के तमाम दावे करते बड़े बड़े होर्डिंग आदि आपको तमाम स्थानों पर लगे दिखाई देते होंगे। इनको देखकर लगता है कि केंद्र व प्रदेश सरकारों द्वारा जनहित में चलाई जा रही योजनाओ का लाभ सभी को मिल रहा है और देश खुशहाली की राह पर अग्रसर है, मगर धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। सरकारी योजनाओ का लाभ देने के बदले कर्मचारियों द्वारा सुविधा शुल्क के नाम पर की जा रही उगाही के समाचार आमतौर पर मीडिया माध्यमों में सुर्खिया बने रहते है और योजनाओ का लाभ जरुरतमंदो को नहीं मिल पाता है।
ऐसा ही एक मामला जनपद बिजनौर नगीना देहात क्षेत्र के कोटकादर से सामने आया है। जहाँ प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत लोन स्वीकृत करने के बदले बैंक प्रबंधक ने रिश्वत की मांग की। कोटकादर निवासी सचिन कुमार पुत्र धर्मपाल के अनुसार उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत ग्रामोद्योग संस्थान बिजनौर से आटा चक्की लगाने हेतु फाइल तैयार कराकर 6 लाख रूपये के लोन के लिया आवेदन किया था। सचिन कुमार का लोन प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक की कोटकादर शाखा में स्वीकृति हेतु लंबित था। सचिन के अनुसार लोन स्वीकृत करने हेतु बैंक प्रबंधक प्रियांशु त्यागी ने उनसे 10 प्रतिशत के हिसाब से 60 हजार रुपये सुविधा शुल्क की मांग की थी। पैसा न देने पर बैंक प्रबंधक ने उसकी फाइल रद्द कर दी थी। सचिन ने दो माह बाद फिर से फाइल भिजवाई थी मगर बैंक प्रबंधक बिना सुविधा शुल्क लिए फाइल पास करने को तैयार नहीं था। सचिन कुमार ने इस मामले की शिकायत भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो गाजियाबाद से की थी।
सचिन द्वारा की गयी शिकायत का संज्ञान लेते हुए सीबीआई ने 8 अगस्त को मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया था। कल गुरुवार को सीबीई की भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो के निरीक्षक सुदेश पाल अपनी टीम के साथ कोटकादर पहुंचे थे। सीबीआई टीम ने कल शाम लगभग 4 बजे बैंक के पूर्व चपरासी मदन को सचिन से 30 हजार रूपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। मदन ने बताया की उसे बैंक प्रबंधक ने ही पैसे लेने भेजा था। इसके बाद सीबीआई टीम ने बैंक प्रबंधक व मदन से आवश्यक पूछताछ की। सीबीआई टीम ने दोनों आरोपियों के आवासीय परिसरों की भी तलाशी ली। तलाशी के दौरान टीम को आपत्तिजनक दस्तावेज मिले। आज शुक्रवार को दोनों आरोपियों को गाजियाबाद स्थित सीबीआई कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।
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