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| धरनास्थल पर मौजूद ग्रामीण व इनसेट में मृतक सुरेंद्र सिंह की फाइल फोटो |
मध्य गंगा नहर के लिए अधिग्रहित की गयी भूमि का अधिक मुआवजा दिए जाने की माँग को लेकर जनपद अमरोहा के रजबपुर क्षेत्र में पिछले 529 दिनों से जारी धरने के दौरान आज रविवार को एक किसान की मौत हो गयी। किसान की मौत पर आक्रोशित हुए धरने पर बैठे अन्य किसानो ने शव को धरनास्थल पर रखकर 50 लाख मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर घंटो तक प्रदर्शन किया। किसान की मौत व हंगामे की सूचना मिलने पर जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया।
पाठको को बताना उचित होगा कि वर्ष 2011 में जनपद अमरोहा के रजबपुर क्षेत्र के गाँव रामपुर घना, मोहनपुर व घंसूरपुर तथा वर्ष 2012 में गांव कूबी की भूमि को मध्य गंगा नहर के लिए अधिग्रहित किया गया था। इस अधिग्रहण के बदले किसानो को सर्किल रेट से चार गुना अधिक मुआवजा मिलने की आशा थी, मगर सरकार द्वारा किसानो को वर्ष 2011 के सर्किल रेट के अनुसार ही भुगतान किया गया था। इसके किसान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर गत 529 दिनों इस कूबी गाँव में धरना दिए हुए है। धरने पर बैठे किसानो का कहना है कि उनकी मांग के अनुसार मुआवजा मिले बिना वे नहर की खुदाई नहीं होने देंगे। इस दौरान मध्य गंगा नहर में पानी छोड़े जाने के बाद किसान और भी उग्र हो गए है और धरने में महिलाये भी शामिल हो गयी है। किसान तमाम जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी माँगे मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचा चुके है मगर कोई ठोस आश्वासन भी नहीं मिल सका है।
आज धरने के 529वे दिन धरने बैठे किसान गांव कूबी निवासी किसान सुरेंद्र सिंह आयु 42 वर्ष की अचानक ही तबियत बिगड़ने लगी। ग्रामीणों द्वारा अस्पताल ले जाए जाने के दौरान रास्ते में ही उनकी मौत हो गयी। किसान उनके शव को वापस धरनास्थल पर ले आये और 50 लाख मुआवजे की मांग करते हुए उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना पर भारतीय किसान यूनियन टिकैत के प्रदेश उपाध्यक्ष दानवीर सिंह समेत अन्य पदाधिकारी भी मौके पर पहुँच गए। प्रदेश उपाध्यक्ष का कहना है कि अधिग्रहण से पूर्व मृतक के पास 6 बीघा जमीन थी अब केवल 1 बीघा बच रही है। उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों को 50 लाख का मुआवजा मिलने तक शव को मौके से नहीं उठने दिया जायेगा। हंगामे की सूचना पर तहसीलदार सदर हेमंत कुमार व एसडीएम सदर सुधीर कुमार मौके पर पहुंचे और किसानो को समझाने का प्रयास किया। घंटो तक चली मशक्क्त के बाद किसान शांत हुए।
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