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बुधवार, फ़रवरी 11, 2026

उझानी/जिला बदायूँ - चार वन दरोगाओ पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज

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एआई जनरेटेड सांकेतिक इमेज 

उत्तर प्रदेश के जिला बदायूं से खाकी को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक महिला ने जिले की सहसवान रेंज में तैनात चार वन दरोगाओं पर सामूहिक दुष्कर्म व मारपीट करने का आरोप लगा है। पीड़ित महिला की शिकायत पर स्थानीय पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने के पर अब अदालत के हस्तक्षेप के बाद उझानी कोतवाली में चारों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।


उक्त घटना गत 10 जनवरी की बतायी जा रही है। सहसवान क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता के अनुसार घटना वाले दिन दोपहर करीब 12 वजे वह दवा लेने के लिए सहसवान से बदायूं जा रही थी। वह उझानी के अकराबाद चौराहे पर वाहन का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान एक कार वहाँ आकर रुकी और कार सवार एक व्यक्ति ने बदायूँ जाने को कहकर उसे अंदर बैठा लिया।


पीड़िता का आरोप है कि कार में पहले से तीन और युवक सवार थे। भैंसोर पुल पार करने के बाद आरोपियों ने कार को मुख्य मार्ग से हटाकर कच्चे रास्ते पर झाड़ियों की ओर मोड़ दिया। वहां चारों आरोपियों ने तमंचे और चाकू के बल पर उसके साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया। विरोध करने पर उसे तमंचे की बट से बुरी तरह पीटा गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। इसी दौरान वहां से गुजर रहे कुछ राहगीरों को देख आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए।


पीड़िता ने द्वारा की गयी शिकायत मे चार लोगो के नाम बताये गए है। इनमे सूरज मोहन, श्यामवीर निवासीगण  गाँव पचेदा कांट, जिला शाहजहांपुर, पुष्पेंद्र निवासी बदायूँ व देवेंद्र निवासी सुभाषनगर, बरेली शामिल है। ये चारों आरोपी वन विभाग की सहसवान रेंज में वन दरोगाके पद पर तैनात हैं। बताया जा रहा है कि इन चारों की तैनाती महज पांच महीने पहले ही हुई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार ये चारों अक्सर एक ही निजी कार से साथ घूमते देखे जाते थे। इस कार का जिक्र घटना में भी किया गया है।


पीड़िता ने आरोप लगाया कि घटना के तुरंत बाद वह उझानी कोतवाली पहुंची थी, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और टाल-मटोल करती रही। इसके बाद महिला ने जिला अस्पताल में उपचार कराया और एसएसपी से भी न्याय की गुहार लगाई, लेकिन जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो उसने न्यायालय की शरण ली। अदालत के आदेश के बाद अब पुलिस हरकत में आई है।


मामला सुर्खियों में आने के बाद वन विभाग के अधिकारी हतप्रभ हैं। हालांकि, विभाग की ओर से आरोपियों का बचाव भी शुरू हो गया है। विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि महिला के परिवार के कुछ सदस्य लकड़ी के अवैध कारोबार में संलिप्त रहे हैं और पूर्व में वन दरोगाओं के साथ उनका विवाद हो चुका है। विभाग इसे रंजिश के तहत फंसाने की साजिश बता रहा है। डा0 देवेंद्र कुमार, क्षेत्राधिकारी उझानी ने बताया कि अदालत के आदेश पर मामला दर्ज कर लिया गया है। प्रार्थना पत्र में आरोपियों के पद का उल्लेख नहीं था, केवल नाम दिए गए थे। विवेचना जारी है और साक्ष्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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