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जिला रामपुर के स्वार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मानवता और रिश्तों को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहाँ एक प्रसूता ने अस्पताल की स्टाफ नर्सों पर गंभीर आरोप लगाए है। प्रसूता का कहना है कि स्टाफ नर्सो ने मोटी रकम के लालच में सांठगांठ कर उसका नवजात पुत्र उसकी ही सगी बहन को सौंप दिया। पीड़िता ने पुलिस को दी गयी तहरीर में अपना बच्चा वापस दिलाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जिला मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा क्षेत्र के फतेहुल्लाहगंज निवासी जूबी पत्नी मोनिश रजा ने बताया कि गर्भवती होने के दौरान अपनी ससुराल स्वार क्षेत्र के गांव चाऊंपुरा में रह रही थीं। गत 30 जनवरी 2026 को प्रसव पीड़ा होने पर वह अपनी मां शाहजहां और बहन अंजुम, निवासी बाजपुर, उत्तराखंड के साथ सीएचसी स्वार पहुंची थीं। जूबी के अनुसार उसने 31 जनवरी को एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया था। पीड़िता का आरोप है कि अस्पताल की स्टाफ नर्सों ने उसकी बहन अंजुम से मोटी रकम लेकर पंजीकरण रजिस्टर में खेल कर दिया। आरोप के अनुसार स्टाफ नर्सो ने बच्चे की असली मां जूबी के स्थान पर उसकी बहन अंजुम पत्नी शाहनवाज का नाम माता के रूप में दर्ज कर दिया।जूबी का कहना है कि बच्चा वापस मांगने पर नर्सों ने उसकी तबीयत खराब होने का बहाना कर मुझे उससे दूर रखा। बाद में पता चला कि मेरा बच्चा मेरी ही बहन को सौंप दिया गया है और रिकॉर्ड में भी उसी का नाम दर्ज है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वार कोतवाली में तहरीर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। कोतवाल स्वार संजीव कुमार ने बताया कि महिला द्वारा दी गयी तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर जल्द ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सीएचसी अधीक्षक डा0 राजीव चंदेल का कहना है कि ऐसा कोई मामला फिलहाल मामला संज्ञान में नहीं है, लेकिन शिकायत मिलने पर विभागीय जांच कराई जाएगी। यदि कोई कर्मचारी दोषी पाया गया तो सख्त कार्रवाई होगी।
यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है, बल्कि एक सगी बहन द्वारा अपनी ही बहन का बच्चा 'खरीदने' की कोशिश रिश्तों के कत्ल जैसी है। फिलहाल पुलिस बच्चे के डीएनए टेस्ट और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगालने की तैयारी में है।
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