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गुरुवार, मार्च 12, 2026

गजरौला/जिला अमरोहा - 35 साल तक सिस्टम की आंखों में झोंकी धूल! दसवी फेल होकर भी बना 'सरकारी बाबू, अब गिरी गाज

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उत्तर प्रदेश के जिला अमरोहा से जालसाजी कर सरकारी नौकरी पाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ  गजरौला नगर पालिका परिषद में तैनात कर एक लिपिक को फर्जी प्रमाण पत्रो के आधार पर नौकरी करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। शासन स्तर पर हुई जांच में उनकी अंकतालिका अवैध पाई गई है।


पाठको को बताना उचित होगा कि गजरौला नगर पालिका कार्यालय में वर्ष 1989 मे अजय कुमार नाम के एक व्यक्ति को संविदा कर्मी के रूप नियुक्त किया गया था। इस नौकरी को पाने और फिर बचाये रखने के लिए अजय ने दो अलग-अलग दावे किए थे। अजय ने पहले दर्शाया था कि उसने वर्ष 1983 मे संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से हाईस्कूल उत्तीर्ण किया है। इस दावे की जाँच करने पर पता लगा कि वर्ष 1983 मे अजय कुमार गजरौला के ज्ञान भारती इंटर कॉलेज के छात्र थे और इसी हाई स्कूल परीक्षा मे फेल हो गए थे। इसके बाद अजय कुमार ने दूसरा दावा किया और दिखाया कि उसने वर्ष 2004 मे बोर्ड ऑफ़ हायर एजुकेशन से हाई स्कूल और वर्ष 2006 मे इंटर किया है। अजय कुमार ने अपने दावे के साथ ही परीक्षा प्रमाण पत्र भी पेश किये। इन प्रमाण पत्रो के आधार पर अजय कुमार को वर्ष 2011 मे संविदा कर्मी से हटाकर स्थायी कर्मचारी के रूप में नियुक्त कर दिया गया था।


इस धोखाधड़ी की भनक लगने पर क्षेत्रीय विधायक राजीव तरारा और नगर पालिका के कुछ सभासदों ने शासन स्तर पर इसकी लिखित शिकायत की थी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए शासन ने जिला विद्यालय निरीक्षक के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की।


जिला विद्यालय निरीक्षक के नेतृत्व मे गठित जांच कमेटी द्वारा की गयी पड़ताल मे सामने आया कि नौकरी पाने के लिए इस्तेमाल की गई हाईस्कूल की अंकतालिका पूरी तरह फर्जी है। जाँच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। शासन ने जाँच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हुए अजय कुमार को तत्काल निलंबित कर दिया है। अधिशासी अधिकारी गजरौला ललित आर्य ने बताया कि शासन स्तर से कराई गई जांच में लिपिक अजय कुमार के अभिलेख सही नहीं पाए गए हैं। कमेटी ने अंकतालिका को फर्जी करार दिया है। आरोपी लिपिक को निलंबित कर स्पष्टीकरण मांगा गया है और कड़ी विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


अजय कुमार के निलंबन के बाद नगर पालिका कार्यालय में हड़कंप मचा हुआ है। विभाग अब यह भी जांच कर रहा है कि इतने वर्षों तक सत्यापन की प्रक्रिया में यह फर्जीवाड़ा कैसे छिपा रहा। आरोपी लिपिक से अब तक लिए गए वेतन की रिकवरी और एफआईआर दर्ज होने की भी संभावना जताई जा रही है।

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